शिमला, सुरेंद्र राणा:हिमाचल प्रदेश में निष्क्रिय बैंक खातों के दावेदारों की पहचान का अभियान बेहद धीमी गति से चल रहा है। प्रदेश के 10.77 लाख निष्क्रिय बैंक खातों में से चार माह में मात्र 8125 खाताधारकों की ही पहचान हो पाई है। बैंकों की इस सुस्त कार्यप्रणाली पर वित्त सचिव अभिषेक जैन ने कड़ी नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो मामले की शिकायत भारतीय रिजर्व बैंक से की जाएगी। सोमवार को राजधानी शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 179वीं बैठक में सामने आया कि प्रदेश के निष्क्रिय खातों में करीब 333 करोड़ रुपये जमा हैं, जो अभी तक वास्तविक हकदारों तक नहीं पहुंच पाए हैं। इन खातों को ऐसे खातों के रूप में चिह्नित किया गया है जिनमें पिछले दस वर्षों से कोई लेनदेन नहीं हुआ। निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन खातों की राशि भारतीय रिजर्व बैंक के पास जमा कराई गई है। निष्क्रिय खातों की धनराशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों पर अक्तूबर 2025 से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत बैंकों को खाताधारकों या उनके उत्तराधिकारियों की पहचान कर राशि लौटाने के निर्देश दिए गए थे।
बैठक में बताया गया कि अभियान शुरू होने के चार माह बाद भी परिणाम बेहद निराशाजनक हैं। 10.77 लाख खातों में से केवल 8125 मामलों का ही निपटारा हो सका है, जो कुल खातों का बेहद छोटा हिस्सा है। 8125 खातों की जांच कर 24 करोड़ रुपये उनके हकदारों तक पहुंचा दिए गए हैं। जिला कांगड़ा में सबसे अधिक 2.25 लाख निष्क्रिय खाते चिन्हित किए गए हैं, लेकिन यहां भी प्रगति बेहद धीमी रही। चार माह में केवल 2111 खातों के दावेदारों की ही पहचान हो पाई है। अधिकारियों ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।
वित्त सचिव अभिषेक जैन ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभियान की गति बेहद धीमी है और इस तरह से वास्तविक लाभार्थियों तक धनराशि पहुंचाना संभव नहीं होगा। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिए कि निष्क्रिय खातों की पहचान और निपटारे की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में निष्क्रिय खातों में जमा 333 करोड़ रुपये लंबे समय से बिना उपयोग के पड़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि कई खाताधारकों की मृत्यु हो चुकी है या वे स्थानांतरित हो गए हैं, जिसके कारण खातों की पहचान में कठिनाई आ रही है।
