हिमाचल पुलिस बनाम दिल्ली पुलिस, सरकार का पक्ष सीएम के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान बोले शिमला पुलिस ने किया अच्छा काम।

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश में 25 और 26 फरवरी की दरमियानी रात दिल्ली पुलिस और हिमाचल पुलिस के बीच हुए टकराव को लेकर अब राज्य सरकार का पक्ष सामने आया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि शिमला पुलिस ने पूरे मामले में बेहतर काम किया है और हिमाचल सरकार ने इस मुद्दे पर स्पष्ट व मजबूत स्टैंड लिया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सभी को कानून का पालन करना होगा और राज्य सरकार की किसी भी अपराधी को बचाने की कोई मंशा नहीं है।विओ,,,मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने हिमाचल प्रदेश में कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। नियमों के अनुसार किसी दूसरे राज्य की पुलिस को प्रदेश में कार्रवाई से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होता है। साथ ही संबंधित FIR लेकर स्थानीय मजिस्ट्रेट से वारंट जारी करवाना और राज्य पुलिस को जानकारी देना जरूरी होता है, लेकिन इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पर्यटन राज्य है और कई बार अन्य राज्यों के अपराधी यहां पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में दूसरे राज्यों की पुलिस स्थानीय पुलिस को सूचित कर विधिवत कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि यह हिमाचल के नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है, ऐसे में बिना पूर्व सूचना और नियमों का पालन किए किसी भी राज्य की पुलिस इस तरह की कार्रवाई नहीं कर सकती।इस दौरान नरेश चौहान ने शिमला पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे मामले में जिम्मेदारी और सतर्कता से काम किया। राज्य सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है कि कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि सरकार की किसी अपराधी को बचाने की कोई मंशा नहीं है।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने इस दौरान भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का नाम लेते हुए कहा कि RDG के मुद्दे पर वह हिमाचल की जनता के हितों के खिलाफ केंद्र सरकार का बचाव करते नजर आए। अब उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए इस मामले पर बयानबाजी कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि दिल्ली पुलिस को निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन करना चाहिए था।

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