शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑटो रिक्शा परमिट को लेकर वर्षों से चली आ रही एक शर्त को खत्म कर दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की यह शर्त कि ऑटो का मालिक ही उसे चलाएगा, न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि सांविधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। अदालत ने कहा है कि ऑटो मालिक की बीमारी या मृत्यु की स्थिति में अब दूसरा व्यक्ति भी ऑटो चला सकेगा।
गौरतलब है कि सतपाल और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में गुहार लगाई थी कि परिवहन विभाग परमिट देते समय यह अनिवार्य शर्त लगाता है कि ऑटो रिक्शा का मालिक स्वयं ही वाहन चलाएगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह नियम तब मुसीबत बन जाता है, जब मालिक बीमार है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो या किसी दुर्घटना के कारण विकलांग हो जाए। ऐसी स्थिति में मालिक न तो खुद ऑटो चला पाता था और न ही किसी और को चालक के तौर पर रख सकता था, जिससे उसकी रोजी-रोटी का साधन छिन जाता था।
