पंजाब दस्तक
उमांशी राणा
महाघोटाला: हिमाचल में ‘मुर्दे’ डकार रहे करोड़ों की पेंशन, हमीरपुर में 931 मृतकों का खुलासा, पूरे प्रदेश में 38 हजार संदिग्ध
हमीरपुर/शिमला: हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नाम पर सरकारी खजाने की खुली लूट का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को हिला कर रख दिया है। विभाग द्वारा हाल ही में शुरू की गई अनिवार्य ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया ने उस ‘काले खेल’ से पर्दा हटा दिया है, जो वर्षों से फाइलों में दफन था।
हमीरपुर का चौंकाने वाला खुलासा:
अकेले जिला हमीरपुर में जांच के दौरान 931 ऐसे लाभार्थी पाए गए हैं जिनकी मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वे आज भी ‘जीवित’ बनकर पेंशन डकार रहे थे। इसके अलावा 208 ऐसे लोग भी चिह्नित किए गए हैं जो आयकर दाता या अन्य सरकारी लाभ लेने के कारण इस योजना के अपात्र थे। कुल मिलाकर जिले में 1139 फर्जी लाभार्थियों ने विभाग को लाखों की चपत लगाई है।
पूरे प्रदेश में फैला जाल:
यह फर्जीवाड़ा केवल हमीरपुर तक सीमित नहीं है। पूरे हिमाचल प्रदेश की बात करें तो ई-केवाईसी न करवाने वाले और संदिग्ध लाभार्थियों का आंकड़ा 38,000 के पार पहुँच गया है। कांगड़ा, मंडी और शिमला जैसे बड़े जिलों में भी हजारों की संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ मृत्यु के बावजूद परिजनों ने विभाग को सूचित नहीं किया और पेंशन लेते रहे। हैरानी की बात तो यह है कि कागजों में कुछ पेंशनरों की उम्र 104 से 124 साल तक दिखाई गई है, जिनकी असलियत की अब गहन जांच हो रही है।
होगी सख्त कार्यवाही और वसूली:
परिजनों पर गिरेगी गाज: विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन परिवारों ने सदस्य की मृत्यु की बात छिपाई, उनसे ब्याज समेत पूरी राशि की वसूली की जाएगी। धोखाधड़ी के मामलों में एफआईआर (FIR) भी दर्ज हो सकती है।
कर्मचारियों की जवाबदेही: पंचायत सचिवों और फील्ड स्टाफ की भूमिका की जांच की जा रही है। आखिर कैसे बिना भौतिक सत्यापन के सालों तक यह भुगतान होता रहा? लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही तय मानी जा रही है।
रोकी गई पेंशन: प्रदेश भर में करीब 5,000 ऐसे लोगों की पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है जिन्होंने सत्यापन प्रक्रिया में भाग नहीं लिया।
निष्कर्ष: यह खुलासा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। जहाँ एक तरफ पात्र बुजुर्ग और विधवाएं पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की नाक के नीचे ‘मुर्दों’ के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट हो रही थी। प्रशासन अब इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुँचने की तैयारी में है।
