HRTC कार्यशाला के निजीकरण के खिलाफ तकनीकी कर्मचारियों का मोर्चा, आंदोलन की चेतावनी

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शिमला, सुरेंद्र राणा: HRTC तकनीकी कर्मचारी संगठन ने निगम की वर्कशॉप के निजीकरण के फैसले के खिलाफ सरकार और प्रबंधन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। HRTC की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (BOD) की बैठक में रामपुर, नालागढ़, पठानकोट और शिमला यूनिट-3 की वर्कशॉप के निजीकरण का निर्णय लिया गया है। इसके विरोध में HRTC तकनीकी कर्मचारी संघ ने इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान HRTC तकनीकी कर्मचारी संघ के राज्य अध्यक्ष पूर्ण चंद ने बताया कि HRTC में स्वीकृत 2267 पदों के मुकाबले केवल करीब 1100 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के चलते आउटसोर्स के जरिए भर्तियां की जा रही हैं, जिससे बेरोजगारी और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी कर्मचारी HRTC की रीढ़ हैं, लेकिन निजीकरण के जरिए इसी रीढ़ को तोड़ने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर संगठन जल्द ही मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। यदि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आगामी समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

वंही प्रदेश में HRTC बसों की दुर्घटनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर पूर्ण चंद ने कहा कि निगम के पास अच्छी गुणवत्ता के स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हैं और न ही ये समय पर मिल पाते हैं। स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण बसें रास्ते में हांफ जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।

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