दिल्ली/लखनऊ/शिमला, सुरेंद्र राणा: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ के खिलाफ उत्तर भारत से लेकर उत्तर प्रदेश (UP) तक जो आक्रोश की लहर उठी थी, आज उस पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपनी मुहर लगा दी है। पंजाब दस्तक की विशेष पड़ताल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इन ‘विभेदकारी’ नियमों पर तत्काल रोक (Stay) लगा दी है।अदालत के भीतर क्या हुआ? (विस्तृत अदालती कार्यवाही)आज जैसे ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने सुनवाई शुरू की, कोर्ट रूम में वकीलों की दलीलों और बेंच की टिप्पणियों से माहौल गरमा गया।बेंच का कड़ा सवाल: चीफ जस्टिस ने यूजीसी के वकील से सीधा सवाल किया, “इन नियमों का आधार क्या है? इसकी शब्दावली इतनी अस्पष्ट क्यों है कि समाज का एक बड़ा वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है?”धारा 3(c) पर तीखी बहस: जब याचिकाकर्ताओं ने धारा 3(c) का जिक्र किया, जिसमें भेदभाव की परिभाषा को संकुचित किया गया है, तो कोर्ट ने माना कि यह प्रावधान समानता के संवैधानिक ढांचे को चोट पहुंचा सकता है। कोर्ट ने कहा, “आप नियमों के जरिए समाज के भीतर नई दीवारें खड़ी नहीं कर सकते।”कोर्ट की ऐतिहासिक फटकार: बेंच ने मौखिक रूप से कहा, “हम 75 साल की लोकतांत्रिक यात्रा तय कर चुके हैं। हम देश के शिक्षण संस्थानों को पीछे की ओर धकेलने वाले और विभाजनकारी मानसिकता वाले नियम स्वीकार नहीं करेंगे। संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) सबसे ऊपर है।”यूपी, पंजाब और हिमाचल का ‘सत्याग्रह’ रंग लायाउत्तर प्रदेश के शहरों से लेकर हिमाचल की वादियों और पंजाब की धरती तक, स्वर्ण समाज और प्रबुद्ध वर्ग ने इन नियमों को “समानता के विरुद्ध” बताया था। यूपी में इस मुद्दे पर हुई बैठकों और विरोध प्रदर्शनों की गूंज आज सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर साफ सुनाई दी। स्वर्ण समाज की दलील थी कि नियमों की आड़ में योग्यता का गला नहीं घोंटा जा सकता।अदालत का फैसला: 19 मार्च तक ‘ताला’पुराने नियम बहाल: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि 19 मार्च 2026 तक देशभर में नए नियम लागू नहीं होंगे। तब तक 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।केंद्र और यूजीसी को अल्टीमेटम: कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर इन नियमों को बनाने से पहले व्यापक चर्चा क्यों नहीं की गई?समिति का गठन: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक उच्च-स्तरीय कमेटी (Jurists Committee) बनाई जाए जो इन नियमों की समीक्षा करे।पंजाब दस्तक का विशेष विश्लेषणयह केवल कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यूपी, हिमाचल और पंजाब के उन युवाओं के संघर्ष की जीत है जो योग्यता और समानता में विश्वास रखते हैं। पंजाब दस्तक इस मुहिम में हमेशा जनता की आवाज बनकर खड़ा रहेगा।ऐसी ही निडर और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें और फॉलो करें – पंजाब दस्तक
