सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर संकट, एक लाख से अधिक लाभार्थियों ने नहीं करवाई e-KYC

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शिमला, सुरेन्द्र राणा:प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर निर्भर एक लाख से अधिक लाभार्थियों की चिंता बढऩे वाली है। निदेशालय अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम के सशक्तिकरण ने ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी न करने वाले लाभार्थियों की पेंशन को अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश जारी किए हैं। निदेशालय की ओर से राज्य के सभी जिला कल्याण अधिकारियों को निर्देश जारी हुए हैं कि जिन 1,17,660 लाभार्थियों ने ईकेवाईसी नहीं करवाई है, उनकी गैर जनजातीय क्षेत्रों में तीन महीने और जनजातीय क्षेत्रों में अग्रिम तौर पर दी जाने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन रोकी जाए। प्रदेश भर में 824,888 एक्टिव लाभार्थी हंै, जिसमें से 7,07,228 बेनिफिशरीज ने ही अपनी ईकेवाईसी करवाई है। प्रदेश भर में ईकेवाईसी कराने वाले सभी लाभार्थियों के खाते में पेंशन 27 दिसंबर तक पड़ जाएगी। बता दें कि हिमाचल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत भुगतान के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए गैर-जनजातीय क्षेत्रों में तीसरी तिमाही अक्तूूबर से दिसंबर और जनजातीय क्षेत्रों में छह महीने के आधार पर अक्तूबर से मार्च तक की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत अनुमानित 372.24 करोड़ का खर्च किए जाएंगे।इस महीने यह पेंशन केवल ऐसे लाभार्थियों के खाते में ही डाली जाएगी, जिन्होंने अपनी ईकेवाईसी करा ली है। समाज में सरकारी योजनाओं का लाभ सही हाथों तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने ईकेवाईसी को अनिवार्य किया है। इसी कड़ी में प्रदेश भर में लाभार्थियों ईकेवाईसी की जा रही थी, जिसमें कुछ जिला ईकेवाईसी कराने के लक्ष्य के करीब पहुंचे हैं, वहीं कई स्थानों बड़ी संख्या में लाभार्थियों का ईकेवाईसी लंबित है। राज्य के जिला कांगड़ा में 1,56,935, मंडी में 1,16,530, हमीरपुर में 48,672, शिमला में 72,598, डोडराक्वार में 710, बिलासपुर में 45,740, सोलन में 46,951, ऊना में 60,386, सिरमौर में 53,670, कुल्लू में 47,356, चंबा में 42,384, पांगी में 736, भरमौर में 3371, किन्नौर में 8676, लाहुल स्पीति में 2442 व काजा में 71 लाभार्थियों ने ईकेवाईसी करवा ली है।15 दिसंबर तक करवानी थी ईकेवाईसीप्रदेश भर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों को ईकेवाईसी कराने के लिए 15 दिसंबर तक आखिरी अवसर दिया गया था। इसके साथ ही जागरूकता के प्रयास भी किए गए। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लाभार्थी तय प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिसका सीधा असर अब उनकी पेंशन पर पड़ा है। विभाग का यह कदम पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और पात्र लाभार्थियों तक ही सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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