शिमला, सुरेन्द्र राणा; हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर आवाज तेज होती जा रही है। HPSEBL आउटसोर्स यूनियन ने सरकार से कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई है। यूनियन का कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद आज तक आउटसोर्स कर्मचारियों को न तो नौकरी की सुरक्षा मिली है और न ही सम्मानजनक वेतन।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड
(HPSEBL) आउटसोर्स यूनियन के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से पूरी निष्ठा और ईमानदारी से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी आउटसोर्स कर्मचारियों को मात्र 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है, जो परिवार के पालन-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए बेहद कम है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अश्वनी शर्मा ने सरकार से मांग की कि आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा प्रदान की जाए, और ठोस नीति बनाई जाये। समान कार्य समान वेतन” के सिद्धांत को लागू किया जाए और दुर्घटना या नौकरी के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में कर्मचारियों के लिए अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए। उन्होंने कहा कि नौकरी के दौरान मृत्यु पर सरकार की तरफ से लख रुपए की राशि दी जाती है जो की बेहद कम है। ऐसी स्थिति में पीछे छूट परिवार को काफी परेशानियां झेलनी पड़ती है। उन्होंने
उम्मीद जताई है की मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में जल्द ही सकारात्मक और न्यायोचित निर्णय लेगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो आगामी समय में हुए आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे।
