धर्म: हिंदू धर्म में एकादशी विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली सफला एकादशी को जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत से भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है और रुके हुए कार्य पूरे होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत करने से हजार अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। यह व्रत पापों का नाश करता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। करियर, नौकरी, व्यापार और पारिवारिक सुख के लिए इसे अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस बार सफला एकादशी 15 दिसंबर को मनाई जाएगी।बता दें कि पौष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 दिसंबर को शाम 6 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। अगले दिन 15 दिसंबर को रात 9 बजकर 21 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा। ऐसे में 15 दिसंबर को सफला एकादशी व्रत रखा जाएगा। 15 को द्वादशी युक्त एकादशी मिल रही है, इसलिए यह एकादशी का व्रत श्रेष्ठ है। इस दिन चित्रा नक्षत्र, शोभना एवं जयद् योग रहेगा, जो इस व्रत के महत्व को और भी बढ़ा रहे हैं। इस दिन स्नान करके शुद्ध कपड़े पहनकर भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी को पंचामृतएवं गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद चंदन, इत्र, तिल, तुलसी, धुप-दीप, नैवेद्ध और पान सुपारी से पूजा करें।
सफला एकादशी व्रत: 15 दिसंबर 2025, सोमवारएकादशी तिथि प्रारंभ: 14 दिसंबर 2025, शाम 06:51 बजेएकादशी तिथि समाप्त: 15 दिसंबर 2025, रात 09:19 बजेव्रत पारण: 16 दिसंबर 2025, सुबह 07:07 से 09:11 बजे तकसफला एकादशी पूजा विधिएकादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु या अच्युत स्वरूप की पूजा करें। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल, धूप-दीप और पंचामृत अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। शाम को दीपक जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएंव्रत के दौरान फल, दूध, दही, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और मूंगफली का सेवन किया जा सकता है। अनाज, चावल और तामसिक भोजन न करें।
