मोहाली, सुरेंद्र राणा; प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सुख शांति भवन, फेज-7, मोहाली में “मेरा गांव बने महान” शीर्षक से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारी सरला, राष्ट्रीय अध्यक्षा, कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ ने की।कार्यक्रम का शुभारंभ कुमारी रियान्शी और हरवीन द्वारा स्वागत नृत्य से हुआ, जबकि बी.के. प्रवीण भाई ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड़ीयां मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में सोनम चौधरी (एडीसी मोहाली), डॉ. जसवंत सिंह (निदेशक कृषि, पंजाब) और डॉ. गुरमेल सिंह (मुख्य कृषि अधिकारी, मोहाली) शामिल रहे।
कार्यक्रम में 52 सरपंचों को शॉल, दिव्य उपहार और साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।
ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी जी प्रभारी, राजयोग केंद्र मोहाली–रूपनगर सर्कल ने सभी को ईश्वरीय आशीर्वाद दिए। लगभग 350 सरपंच, पंच और प्रगतिशील किसान इस अवसर पर उपस्थित रहे और ब्रह्मा भोज का आनंद लिया।
मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी सरला दीदी जी ने अपने संबोधन में कहा कि पहले गांवों में बिजली और सड़कों की कमी थी, लेकिन वहां जीवन-मूल्य और सहयोग की भावना गांवों को रोशन करती थी। आज आत्म-सम्मान की कमी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और अन्य सामाजिक बुराइयों ने गांवों की स्थिति को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि मिट्टी की उर्वरता घटने और रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से कैंसर और हृदय रोग जैसे गंभीर रोग बढ़े हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ब्रह्माकुमारी संस्थान की “शुद्ध योगिक खेती” को अपनाने की आवश्यकता है, जो केवल उर्वरक से नहीं बल्कि सकारात्मक सोच से भी कृषि में सुधार लाती है।
दीदी सरला ने किसानों और सरपंचों से आह्वान किया कि वे सकारात्मक और दिव्य मानसिकता अपनाएं, ताकि वे अपने साथ-साथ समाज का भी उत्थान कर सकें।
मुख्य अतिथि कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड़ीयां ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसानों और सरपंचों में योगिक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का ब्रह्माकुमारी संस्थान का कार्य अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने बताया कि पंजाब देश को 24 प्रतिशत चावल और 49 प्रतिशत गेहूं की आपूर्ति करता है, इसलिए भारत सरकार को पंजाब के समर्थन हेतु और कदम उठाने चाहिए ताकि उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि हो सके और किसानों को लाभ मिले।
ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी जी ने कहा कि ध्यान और राजयोग न केवल किसानों की मानसिक स्थिति सुधार सकते हैं, बल्कि खेती की गुणवत्ता भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम सही विचारों और स्वच्छ मानसिकता के साथ प्राकृतिक खेती करें तो हमारे गांव समृद्ध बनेंगे और वास्तव में महान कहलाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल और तकनीकी उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से आज गांवों में भी कई समस्याएँ बढ़ रही हैं, इसलिए आवश्यक है कि हम अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को शामिल करें ताकि स्वास्थ्य, परिवार और समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।
एडीसी मोहाली सोनम चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि हमारी नीयत साफ़ और हमारे विचार शुद्ध हों तो हम कृषि उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। आत्मनिर्भर और समाज के लिए उपयोगी बनने के लिए हर व्यक्ति को उच्च आदर्श अपनाने चाहिए।
डॉ. गुरदियाल कुमार, कृषि अधिकारी, ने ब्रह्माकुमारी सरला दीदी जी द्वारा दिए गए सुझावों की सराहना की और कहा कि कृषि को अध्यात्म से जोड़ना आवश्यक है तथा प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें सभी प्रमुख अतिथियों और सरपंचों ने भाग लिया। ब्रह्माकुमारी संस्थान ने इस अवसर पर यह संदेश दिया कि गांवों की प्रगति और सुधार के लिए मानसिकता तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण में परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है।
अंत में ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी जी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
