बिहार: बिहार के मतदाता अब मतदान केंद्र पर अपना मोबाइल ले जा सकेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को कहा कि मतदान कक्ष के ठीक बाहर तक मतदाता मोबाइल ले जा सकते हैं। हर बूथ पर मोबाइल जमा कराने की सुविधा होगी। मतदान कक्ष में प्रवेश करने से पहले उन्हें मोबाइल छोड़ देना होगा। वोट डालकर निकलने के बाद वे मोबाइल वापस ले लेंगे। पिछले साल ही यह व्यवस्था शुरू की गई थी। बिहार के सभी 90 हजार बूथों पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रत्याशी अब मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी पर अपने स्तर पर सहायता केंद्र खोल सकते हैं। पहले इसे पोलिंग बूथ से दूर रखा जाता था। उन्होंने बताया कि अब राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी। बिहार चुनाव में 17 नवाचार किए जा रहे हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने ईवीएम पर प्रत्याशियों की रंगीन तस्वीर लगाने का प्रावधान किया है। ब्लैक एंड व्हाइट फोटो से पहचान में दिक्कत की शिकायत मिलने पर यह व्यवस्था की गई है। प्रत्याशियों की क्रम संख्या को भी बोल्ड फॉन्ट में अंकित किया जाएगा, ताकि बुजुर्ग मतदाताओं को सुविधा हो। मतदाताओं को दी जाने वाली पर्ची पर पोलिंग बूथ का नाम और पता भी बोल्ड फॉन्ट में दर्ज किया जाएगा।
वोटर कार्ड वितरण की हर चरण की समीक्षा की व्यवस्था की गई है। 15 दिनों में फोटो आईडी कार्ड वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। इस कार्य में लगे बीएलओ को भी आई कार्ड दिया जाएगा। सीईसी ने कहा कि किसी भी मतदान केंद्र पर 12 सौ से अधिक वोटर नहीं होंगे। पहले इसे 15 सौ तक रखा जाता था। अब हर पोलिंग स्टेशन पर शत प्रतिशत वेबकास्टिंग की जाएगी। बिहार में पहली बार बूथ लेवेल एजेंटों की ट्रेनिंग दिल्ली में कराई गई है। बीएलओ और सुपरवाइज को प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस पदाधिकारियों को पहले जिला या राज्य स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता था। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बिहार के मतदाताओं से चुनाव महापर्व को छठ और अन्य त्योहारों की तरह उत्सव के रूप में मनाने की अपील की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि बिहार में विधानसभा चुनाव 22 नवंबर से पहले संपन्न करा दिए जाएंगे। बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक ही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार की तरह पूरे देश में एसआईआर करवाया जाएगा।
