शिमला, सुरेंद्र राणा;
मोदी सरकार रविवार को संसदमें आम बजट पेश करेगी, जिसमें रेल बजट भी शामिल होगा। इस बजट से हिमाचल प्रदेश को क्या राहत मिलेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। बजट से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर राज्य से जुड़े अहम मुद्दे उठाए हैं।मुख्यमंत्री ने केंद्र के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें राजस्व घाटा अनुदान, लोन लिमिट बढ़ाने, ग्रीन फंड और आपदा राहत से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष प्रावधान जरूरी हैं, क्योंकि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं और आपदा का खतरा अधिक रहता है।मुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान को कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये प्रति वर्ष तय करने की मांग की है, ताकि राज्य की वित्तीय चुनौतियों से निपटा जा सके। इसके अलावा हिमालयी राज्यों के लिए सालाना 50 हजार करोड़ रुपये का अलग ग्रीन फंड बनाने की मांग रखी गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास कार्यों को गति मिल सके।सीएम सुक्खू ने आपदा जोखिम को देखते हुए पहाड़ी राज्यों के लिए अलग डिजास्टर रिस्क इंडेक्स और बजट में विशेष प्रावधान की भी मांग की है। साथ ही, उन्होंने एफआरबीएम एक्ट की सीमा से अतिरिक्त दो फीसदी तक कर्ज लेने की अनुमति देने का आग्रह किया है, ताकि आपदा से हुए नुकसान के बाद विकास और बुनियादी ढांचे के कामों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।अब निगाहें 1 फरवरी के बजट पर टिकी हैं, जिसमें यह साफ होगा कि केंद्र हिमाचल की इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है।
