शिमला, सुरेन्द्र राणा:
स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री द्वारा न तो महंगाई भत्ता और न ही लंबित वित्तीय लाभ देने की घोषणा करने पर प्रदेश के पेंशनरों ने नाराजगी जताई है। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर और महासचिव भूप राम वर्मा ने प्रेस बयान जारी कर सरकार की कड़ी निंदा की है।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के 60 प्रतिशत संशोधित वित्तीय लाभ जैसे ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और कम्युटेशन लंबित हैं। इसके अलावा 110 महीने का बकाया महंगाई भत्ता और 13 प्रतिशत डीए भी अब तक जारी नहीं किया गया। पिछले दो सालों से करोड़ों रुपये के चिकित्सा बिल विभिन्न विभागों में लंबित पड़े हैं। कई सेवानिवृत्त कर्मचारी तो अब स्वर्ग सिधार चुके हैं, लेकिन उनके बिल और लाभ का भुगतान जीते-जी नहीं हो पाया।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि 15 अप्रैल 2025 को देहरा में 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज दिन तक उसे लागू नहीं किया गया।
पेंशनर्स नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 20 सितम्बर तक लंबित देनदारियां और महंगाई भत्ता जारी नहीं किया गया तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए संघर्ष समिति की 15 संगठनों की बैठक 10 दिन के भीतर बुलाई जाएगी और 20 से 30 सितम्बर के बीच किसी भी दिन आंदोलन का ऐलान हो सकता है। शिमला में रैली निकालकर सचिवालय और विधानसभा का घेराव भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर विधायकों और मंत्रियों का वेतनमान 2,10,000 से बढ़ाकर 2,90,000 रुपये कर चुकी है और महंगी गाड़ियां खरीदकर सरकारी खजाने पर बोझ डाल रही है, वहीं पेंशनरों के बकाया चुकाने से बच रही है। यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार को समय आने पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।
