सुरेंद्र राणा (वरिष्ठ ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
शिमला: हिमाचल प्रदेश की महत्वाकांक्षी ‘हिमकेयर योजना’ में सरकारी खजाने और जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले कथित महाघोटाले पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की विशेष जांच टीम (SIT) ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक घेराबंदी शुरू कर दी है। योजना के संचालन में हुई वित्तीय धांधलियों की परतें खोलते हुए विजिलेंस ने 71 निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लिया है, जहां 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध भुगतानों पर एसआईटी का शिकंजा पूरी तरह कस चुका है।
विजिलेंस की यह तफ्तीश अब केवल अस्पताल स्तर पर कथित अनियमितताओं की पड़ताल तक सीमित नहीं है। योजना के संचालन से जुड़े स्वास्थ्य निदेशालय, सचिवालय और आईजीएमसी (IGMC) के बीच हुए तमाम पत्राचार को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। इसी क्रम में अब तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव (सेक्रेटरी हेल्थ) से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से इन बिंदुओं पर होंगे तीखे सवाल:
शीर्ष प्रशासनिक निगरानी: योजना के संचालन के दौरान शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक निगरानी किस तरह रखी गई और क्या तय प्रक्रियाओं का पालन हुआ?
निजी अस्पतालों का चयन व व्यक्तिगत मंजूरियां: चहेते निजी अस्पतालों को योजना के पैनल में शामिल करने, उपचार की दरें तय करने और दावों के सत्यापन से जुड़े निर्णय किस आधार पर लिए गए?
शिकायतों और ऑडिट आपत्तियों पर एक्शन: स्वास्थ्य विभाग को मिली तमाम शिकायतों और ऑडिट आपत्तियों पर उस समय क्या ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की गई, इसका पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
डॉ. जनक राज से हो चुकी है पूछताछ:
हिमकेयर मामले की जांच के तहत आईजीएमसी के तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक और वर्तमान भाजपा विधायक डॉ. जनक राज से भी विजिलेंस पहले ही पूछताछ कर चुकी है। उनसे उनके कार्यकाल के दौरान हिमकेयर के तहत उपचार, क्लेम की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अहम सवाल पूछे गए थे।
71 निजी अस्पताल और IGMC के रिकॉर्ड व क्लेम की पड़ताल:
जांच के दौरान विजिलेंस ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) अस्पताल शिमला के तमाम रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर खंगाले हैं। 71 निजी अस्पतालों की ओर से हिमकेयर के तहत भेजे गए दावों और उनके समर्थन में लगाए गए दस्तावेजों, मरीजों के उपचार, बिलिंग व भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की सिलसिलेवार पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसी यह पुख्ता करने में जुटी है कि उपचार क्लेम तैयार करने, उनके सत्यापन और अंतिम भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित सरकारी नियमों का पालन हुआ है या आंखें मूंदकर फर्जीवाड़े को हरी झंडी दी गई।
इसके अलावा उपचार दरों, अस्पतालों की सूची, क्लेम प्रक्रिया, भुगतानों और ऑडिट से संबंधित तमाम फाइलों को व्यवस्थित तरीके से खंगाला जा रहा है। विजिलेंस की इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष गलियारों से लेकर निजी अस्पताल प्रबंधन तक में भारी हड़कंप मचा हुआ है।
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