शिमला (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक):
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण विकास और गरीबों के उत्थान के नाम पर आए बजट में सेंध लगाने वाले पूर्व नुमाइंदों के खिलाफ सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और आर-पार की जंग छेड़ दी है। पूरे सूबे के 1,012 पूर्व पंचायत प्रधानों से सरकारी खजाने की ₹5.12 करोड़ की भारी-भरकम राशि वसूलने के लिए पंचायती राज विभाग ने कड़े तेवर अपनाते हुए उनकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की और नीलामी का बिगुल फूंक दिया है।
यह कठोर कदम 14वीं विधानसभा की ग्रामीण नियोजन समिति के 22वें प्रतिवेदन में दर्ज गंभीर वित्तीय आपत्तियों और सिफारिशों के बाद उठाया गया है। विधानसभा समिति के तल्ख रुख को देखते हुए राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार का दो-टूक पक्ष: सचिव सी. पालरासू ने फील्ड अफसरों को दिए सख्त फरमान
हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासू ने इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए सरकार का स्पष्ट रुख सामने रखा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश भर में 1012 पूर्व प्रधानों के जिम्मे ₹5.12 करोड़ की वित्तीय देनदारी लंबित है। सभी जिला पंचायत अधिकारियों (डीपीओ) और खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ – ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) को त्वरित एक्शन लेने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सचिव ने साफ चेतावनी दी है कि यदि पूर्व प्रधान वसूली की रकम जमा कराने में सहयोग नहीं करेंगे, तो राजस्व विभाग के नियमों के तहत उनकी जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों को अटैच कर नीलाम किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी सचेत किया है कि फील्ड में किसी भी स्तर पर सुस्ती या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अफसर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी और विभागीय गाज उन पर भी गिरेगी। हर जिले को अपनी प्रगति रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय भेजने को कहा गया है।
मौजूदा और भावी प्रधानों के लिए खुला सबक: वर्तमान प्रतिनिधि भी न रहें मुगालते में!
यह व्यापक कार्रवाई सिर्फ पुराने दागियों के हिसाब-किताब तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों और भविष्य में प्रधानी का ख्वाब देख रहे लोगों के लिए भी कड़ा संदेश है। वर्तमान में कुर्सी पर बैठे प्रधान यह कतई न समझें कि वे जांच के दायरे से बाहर हैं; वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी पाए जाने पर मौजूदा प्रधानों पर भी तुरंत निलंबन और कानूनी डंडा चल सकता है।
वह जमाना पूरी तरह बीत चुका है जब कागजों में फर्जी बिल और विकास कार्यों की लीपापोती फाइलों के नीचे दब जाया करती थी। आज का दौर पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और तकनीक आधारित है। जियो-टैगिंग, ऑनलाइन भुगतान प्रणालियां, आरटीआई और हर ग्रामीण के हाथ में मौजूद स्मार्टफोन ने जवाबदेही को सौ गुना बढ़ा दिया है। गांव का जागरूक नागरिक अब हर ईंट और सड़क की वीडियो रिकॉर्डिंग रखता है। इसलिए जो भी प्रतिनिधि पद पर बैठें, वे जनहित और गरीबों के भले को सर्वोपरि रखकर पूर्ण ईमानदारी से काम करें। अगर किसी ने भी नियम ताक पर रखकर हेराफेरी करने की कोशिश की, तो कुर्सी छिनने के बाद ऐसी ही कानूनी कुर्की, बदनामी और नीलामी का सामना करना तय है।
जिलावार वित्तीय गड़बड़ियों का पूरा कच्चा चिट्ठा
वसूली के आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि सिरमौर जिले में सबसे बड़ी रकम का गबन हुआ है, जबकि मंडी जिले में दागी पूर्व प्रधानों की संख्या सबसे अधिक है:
सिरमौर: सबसे बड़ी रकम की चपत; 257 पूर्व प्रधानों से ₹1.76 करोड़ की भारी-भरकम वसूली तय।
मंडी: दागी चेहरों में अव्वल; 323 पूर्व प्रधानों से ₹1.25 करोड़ से अधिक का बकाया सरकारी खजाने में आना बाकी।
चंबा: 82 पूर्व प्रधानों के जिम्मे सीधे ₹99 लाख की देनदारी।
हमीरपुर: 128 पूर्व प्रधानों से ₹47.82 लाख की कानूनी रिकवरी की जाएगी।
ऊना: 38 पूर्व प्रधानों पर ₹41.28 लाख की राशि बकाया।
शिमला: 24 पूर्व प्रधानों से ₹15.98 लाख का हिसाब लिया जाना है।
सोलन: 53 पूर्व प्रधानों से ₹15.21 लाख की भरपाई होनी शेष है।
कांगड़ा: 68 पूर्व प्रधानों के ऊपर ₹13.30 लाख की देनदारी।
बिलासपुर: 23 पूर्व प्रधानों से ₹11.64 लाख की वसूली प्रक्रियाधीन।
कुल्लू: 5 पूर्व प्रधानों से ₹10.31 लाख का सरकारी बकाया।
किन्नौर: 7 पूर्व प्रधानों से ₹1.54 लाख की वसूली के आदेश।
लाहौल-स्पीति: 4 पूर्व प्रधानों से ₹19,605 की कानूनी रिकवरी की जाएगी।
नहीं बचेंगे दोषी, पाई-पाई होगी वसूल
विभागीय फरमान के बाद अब नोटिसों का समय समाप्त हो चुका है और राजस्व विभाग के साथ समन्वय बनाकर कुर्की की रूपरेखा तैयार की जा रही है। विकास कार्यों का बजट दबाकर बैठे जनप्रतिनिधियों में इस आदेश से हड़कंप मचा हुआ है।
जनहित से जुड़ी ऐसी ही निष्पक्ष, सटीक और तीखी खबरों के लिए पंजाब दस्तक के साथ लगातार बने रहें। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें, पेज को फॉलो करें और देखते रहें जन-सरोकारों का सच्चा पहरेदार—पंजाब दस्तक।

