रोहड़ू-चिड़गांव मार्ग पर सड़क निर्माण के दौरान कथित अवैध मलबा डंपिंग और ट्रैफिक जाम।

​विकास के नाम पर विनाश का नंगा नाच: रोहड़ू में ठेकेदार की गुंडागर्दी चरम पर, जंगलों में फेंका मलबा; 5 घंटे से तड़पते रहे मरीज, गहरी नींद में सोया प्रशासन!

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रोहड़ू (ठियोग) से पंजाब दस्तक के लिए रिपोर्टर निशांत ठाकुर की तीखी ग्राउंड रिपोर्ट
​पंजाब दस्तक (रिपोर्टर निशांत ठाकुर, ठियोग):

हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू-चिड़गांव तहसील के पंचायत घर से गुशाली मार्ग पर विकास की आड़ में पर्यावरण और इंसानी जिंदगियों की सरेआम बलि चढ़ाई जा रही है। ठियोग से पंजाब दस्तक के रिपोर्टर निशांत ठाकुर की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट ने ठेकेदार और भ्रष्ट व्यवस्था के गठजोड़ की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। सड़क निर्माण के नाम पर ठेकेदार की तानाशाही इस कदर बेकाबू हो चुकी है कि सारे सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए टन भारी मलबा सीधे हरे-भरे जंगलों और चलती सड़कों पर उड़ेल दिया गया है।
​यह कोई कुदरत का कहर या भूस्खलन नहीं, बल्कि ठेकेदार की जेब भरने की हवस और खुली दादागिरी का नतीजा है!


​अस्पताल के रास्ते में तड़पते रहे मरीज, घर में चाय की चुस्कियां लेता रहा ठेकेदार
​रिपोर्टर की ज़मीनी पड़ताल में रोंगटे खड़े करने वाला खुलासा हुआ है। सड़क पर फैलाए गए अवैध मलबे के कारण एम्बुलेंस और सैकड़ों गाड़ियां पिछले 5-5 घंटों से चिलचिलाती धूप और जाम में फंसी रहीं।


​अस्पताल की ओर भाग रहे गंभीर मरीज जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे, और लाचार जनता रोती-बिलखती रही। लेकिन जनता के इस दर्द से बेखबर, बेखौफ ठेकेदार अपने घर में आराम से चाय की चुस्कियां तोड़ता रहा। चंद रुपये बचाने और डंपिंग यार्ड तक गाड़ी न ले जाने की नीयत से मासूम जनता की सांसों पर ब्रेक लगा दिया गया है।


​पंजाब दस्तक का सीधे सरकार, शासन और सचिवों पर करारा प्रहार:
​सचिव, वन विभाग (Forest Secretary) जवाब दें: क्या रोहड़ू का फॉरेस्ट डिपार्टमेंट पूरी तरह बिक चुका है या कुंभकर्णी नींद में सोया है? हरी-भरी देवदार की वादियों की छाती पर बेखौफ मलबा डंप कर पेड़-पौधों को दफनाया जा रहा है, क्या आपके अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बंधी है?


​सचिव, लोक निर्माण विभाग (PWD Secretary) व मंत्री विक्रमादित्य सिंह जी जवाब दें: क्या प्रदेश में कानून-व्यवस्था खत्म हो चुकी है? आपने इन मनचले ठेकेदारों को जनता की गर्दनों पर सवार होने की खुली छूट किस हैसियत से दे रखी है?
​सचिव, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Environment, Science & Technology) जवाब दें: एक तरफ प्रदेश बादल फटने और भूस्खलन की भयानक आपदाएं झेल रहा है, दूसरी तरफ इस तरह अवैध डंपिंग से पहाड़ों की नींव खोदी जा रही है। पर्यावरण मंत्रालय की यह आपराधिक चुप्पी क्या इशारा करती है?


​अब आर-पार की लड़ाई: तुरंत दर्ज हो FIR!
​पंजाब दस्तक के माध्यम से ठियोग से रिपोर्टर निशांत ठाकुर का यह अंतिम और सीधा अल्टीमेटम है कि अगर इस अवैध डंपिंग को तुरंत बंद करके दोषी ठेकेदार का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया और उस पर पर्चा दर्ज नहीं हुआ, तो यह जनआक्रोश सड़कों पर फूटेगा।


​जनता की अदालत में सवाल:
​क्या ऐसे बेखौफ और लापरवाह ठेकेदार पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करके उसे जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाना चाहिए? कमेंट्स में अपनी राय जरूर दें!


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