पंजाब दस्तक
विशेष रिपोर्ट: संदीप (कांगड़ा) / सुशील | पंजाब दस्तक
कांगड़ा: कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र में स्थापित टोल प्लाजा और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की मनमानी के खिलाफ जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब फोरलेन हाईवे कांगड़ा के कछियारी तक ही अधूरा बना है और आगे मंडी व परौर तक का पूरा पैच अभी तक तैयार ही नहीं हुआ, तो फिर जनता की जेब पर बेतहाशा टोल टैक्स का बोझ कैसे लादा जा सकता है? स्थानीय नेता मुनीश शर्मा ने चंगर क्षेत्र के नौकरीपेशा लोगों, किसानों, धार्मिक श्रद्धालुओं और अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले गंभीर मरीजों पर पड़ रही इस दोहरी मार को लेकर स्थानीय विधायक और सिस्टम को आड़े हाथों लिया है।
हाईवे अधूरा, फिर भी वसूली पूरी: नियम ताक पर
मुनीश शर्मा ने तकनीकी और नीतिगत खामियों पर उंगली उठाते हुए कहा:
फोरलेन का निर्माण अभी केवल कछियारी तक ही हुआ है। परौर और मंडी तक का हाईवे अभी भी अधूरा पड़ा है।
नियमानुसार जब तक पूरा पैच पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक इस तरह भारी-भरकम टोल दरें लागू करना जनता के साथ सरासर अन्याय और लूट है। विकास के नाम पर जनता थोड़ा सहयोग कर सकती है, लेकिन अधूरे निर्माण पर अंधाधुंध टैक्स वसूलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और गंभीर मरीजों पर भी टोल की मार
मुनीश शर्मा ने बताया कि इस गलत जगह पर टोल लगाने का खामियाजा श्रद्धालुओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी भुगतना पड़ रहा है:
धार्मिक श्रद्धालु: रोजाना सैकड़ों स्थानीय श्रद्धालु प्रसिद्ध नागनी माता मंदिर और माता बगलामुखी मंदिर के दर्शनों के लिए जाते हैं, जिन्हें अब अपनी आस्था के लिए भी भारी टोल चुकाना पड़ रहा है।
इलाज के लिए जाने वाले मरीज: कांगड़ा और चंगर क्षेत्र से रोजाना कम से कम 100 से 150 गाड़ियां गंभीर मरीजों को लेकर होशियारपुर, लुधियाना (DMC) और टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए जाती हैं।
यदि यह टोल प्लाजा पहले से तय जगह पर होता, तो इन श्रद्धालुओं और जिंदगी-मौत से जूझ रहे मरीजों को एक भी पैसा टोल नहीं देना पड़ता। लेकिन गलत जगह पर टोल स्थापित होने के कारण आज मरीजों और एंबुलेंस जैसी स्थिति में चलने वाले परिजनों की जेब भी काटी जा रही है।
चंगर के 12-14 हजार कमाने वाले नौकरीपेशा युवाओं पर डाका
कांगड़ा क्षेत्र के रोजगार हब होने का जिक्र करते हुए मुनीश शर्मा ने कहा:
चंगर और ग्रामीण क्षेत्र के हजारों युवा कांगड़ा के फोर्टिस अस्पताल, बालाजी अस्पताल, सिटी अस्पताल, विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों, बड़े शॉपिंग मॉल्स और निजी दुकानों में 12 से 14 हजार रुपये की मामूली नौकरी करते हैं।
कई लोग मिलकर कंट्रीब्यूशन (कार-पूलिंग) कर एक गाड़ी से आते हैं।
पहले जहां 25 और 32 रुपये टोल लिया जाता था, उसे अब बढ़ाकर 65 से 100 रुपये कर दिया गया है। महीने का 3000 रुपये सिर्फ टोल में चला जाएगा, तो गरीब कर्मचारी अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेगा?
ज्वालाजी से हटाकर कांगड़ा में क्यों ठोका गया टोल?
मुनीश शर्मा ने खुलासा किया कि यह टोल प्लाजा पहले भग्वा से आगे, ज्वालाजी विधानसभा की सीमा पर प्रस्तावित था। लेकिन सरकार बदलते ही ज्वालाजी के विधायक संजय रतन ने इसे अपने हलके से हटवा दिया। इसके बाद कंपनी ने किसके साथ साठगांठ की कि इसे कांगड़ा की सीमा में लाकर जनता के सिर पर थोप दिया गया? आज कांगड़ा की जनता भुगत रही है और स्थानीय विधायक चुप्पी साधे बैठे हैं।
किसानों और ट्रांसपोर्टरों का दिवाला
किसान बेहाल: चंगर में पानी की कमी से वैसे ही सीमित फसल होती है। जब किसान अपनी उपज कांगड़ा मंडी बेचने आते हैं, तो भारी टोल के चलते जीप का किराया और तेल का खर्च तक नहीं निकलता।
ट्रांसपोर्टर परेशान: ट्रकों का टोल 200-400 से बढ़ाकर 500 रुपये तक कर दिया गया है। वहीं जब गाड़ियां पासिंग सेंटर जाती हैं और लौटती हैं, तो 300 रुपये का अतिरिक्त झटका झेलना पड़ता है।
हादसों का खतरा: आवश्यक स्थानों पर ओवरब्रिज और अंडरपास न होने से लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।
एसडीएम से मिला प्रतिनिधिमंडल, विधायक से हस्तक्षेप की मांग
जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच आज स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल कांगड़ा की एसडीएम मैडम से मिला और अपनी समस्याएं रखीं। एसडीएम ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों से इस संबंध में बात की है।
मुनीश शर्मा ने कहा कि केंद्र में बीजेपी की सरकार है और स्थानीय विधायक भी उसी दल के हैं। विधायक बार-बार कहते रहे हैं कि वे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बात करके समाधान करवाएंगे, लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। मुनीश शर्मा ने मांग की है कि इस टोल प्लाजा को तुरंत सही जगह पर शिफ्ट किया जाए और जब तक पूरा हाईवे नहीं बन जाता, तब तक स्थानीय जनता और वाहनों से अवैध वसूली बंद की जाए, अन्यथा जनता उग्र आंदोलन के लिए विवश होगी।
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