हमीरपुर (पंजाब दस्तक ब्यूरो/उमांशी राणा):
हिमाचल प्रदेश के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों और कर्मचारियों में स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर राज्य सरकार के रवैये के खिलाफ आक्रोश की प्रचंड ज्वाला भड़क उठी है। 15 अगस्त की सुबह से ही प्रदेश भर के लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारी टीवी स्क्रीन और अखबारों पर टकटकी लगाए बैठे थे कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने वादे के मुताबिक डीए (महंगाई भत्ते) और 40% एरियर का बड़ा ऐलान करेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री के भाषण ने जीवनभर सेवा देने वाले बुजुर्गों की तमाम उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
’पंजाब दस्तक’ पर छलका पेंशनरों का दर्द: “बच्चों के हाथ मजबूत करने की आस भी टूटी”
‘पंजाब दस्तक’ की ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम से बात करते हुए कई वरिष्ठ पेंशनरों की आंखें नम और आवाज में गहरा रोष था। पेंशनरों ने कहा:
”हम सुबह से इस आस में बैठे थे कि स्वतंत्रता दिवस पर सरकार हमारे हक का लंबित डीए और बकाया एरियर जारी करेगी, ताकि इस कमरतोड़ महंगाई में बच्चों और परिवार के हाथ मजबूत किए जा सकें। पर सरकार ने डीए का नाम तक नहीं लिया और एरियर में भी श्रेणियों के नाम पर केवल 15% और 30% का झुनझुना थमा दिया। डीए कोई खैरात नहीं, हमारा खून-पसीने से कमाया हुआ हक है। इस उपेक्षा से पूरे हिमाचल का पेंशनर वर्ग खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है।”
सचिवालय के वादे से मुकरने का आरोप: “मुख्यमंत्री की जुबान पत्थर की लकीर होती है”
हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 13 जनवरी 2026 को सचिवालय में हुई आधिकारिक बैठक में मुख्यमंत्री ने खुद सभी पेंशनरों को स्पष्ट आश्वासन दिया था कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए सभी वर्गों को उनकी कुल बकाया राशि का 40% एकमुश्त 31 जुलाई 2026 से पहले दे दिया जाएगा और लंबित डीए/डीआर की किस्तें भी अदा होंगी।
सुरेश ठाकुर ने दो टूक कहा:
”लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुख्यमंत्री के मुख से निकला शब्द ‘पत्थर की लकीर’ माना जाता है। लेकिन आज की गई घोषणा सीधे तौर पर सरकारी वादाखिलाफी है। क्लास 1 व 2 को महज 15% और क्लास 3 को 30% की आधी-अधूरी घोषणा कर बुजुर्गों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई गई है।”
अक्टूबर के पहले हफ्ते से प्रदेशव्यापी चक्का जाम की चेतावनी
समिति के महासचिव इंद्रपाल शर्मा, अतिरिक्त सचिव भूपराम वर्मा और प्रेस सचिव लाइक राम शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि अब पेंशनरों के सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है। 8 अगस्त 2026 को शाहपुर की बैठक में तय रणनीति के अनुसार पूरे प्रदेश में मोर्चा खोला जाएगा:
समान अधिसूचना की मांग: सरकार बिना किसी भेदभाव के क्लास 1, 2 और 3 के सभी पेंशनरों को 40% बकाया और लंबित महंगाई भत्ते की तुरंत अधिसूचना जारी करे।
100% भुगतान तक जंग: जब तक 100% एरियर और 15% लंबित डीए की किस्तों का पूर्ण भुगतान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
अक्टूबर में आर-पार का संग्राम: यदि सरकार ने अधिसूचना जारी करने में देरी की, तो अक्टूबर के पहले सप्ताह से पूरे प्रदेश में ऐसा उग्र और ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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