शिमला (पंजाब दस्तक):
रिपोर्ट: काजल, वरिष्ठ पत्रकार
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में अपनी मर्जी के स्टेशनों पर टिके रहने और तबादले रुकवाने के लिए चलने वाले ‘सिफारिशी खेल’ पर सचिवालय ने जोरदार प्रहार किया है। डॉक्टरों की मनमानी पर सरकार का डंडा चलते ही पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। 21 से 25 अगस्त के बीच स्वास्थ्य सचिवालय के कार्मिक और मानव संपदा विंग द्वारा की गई अंदरूनी समीक्षा में बड़े खुलासे हुए, जिसके बाद 14 मेडिकल अफसरों के मामलों को सीधे जांच के दायरे में लेकर विवादित व मनमाने आदेशों को रद्द करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
तबादला हुआ तो ज्वाइन करना ही होगा, शहर का मोह छोड़ जाना होगा बाहर
सचिवालय ने दो टूक चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि ट्रांसफर ऑर्डर जारी होने के बाद अब हर हाल में संबंधित स्टेशन पर जॉइनिंग देनी ही होगी। समीक्षा में ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं जहां आदेश जारी होने के बावजूद डॉक्टर नई तैनाती वाली जगह पहुंचे ही नहीं और सचिवालय से आदेश कैंसल करवाने के जोड़-तोड़ में लगे रहे। ऐसे अफसरों पर अब सीधी प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिरनी तय है।
शहरों की चाह में खाली पड़े हैं दूर-दराज के अस्पताल
शहरों और सुगम स्टेशनों पर डटे रहने की होड़ के कारण ग्रामीण और दूर-दराज के अस्पतालों में लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं और मरीज डॉक्टरों की राह देख रहे हैं। सचिवालय के इस कड़े कदम से दूर-दराज के स्वास्थ्य संस्थानों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब केवल रसूख या सिफारिश के दम पर पोस्टिंग रुकवाने या बदलवाने की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। ट्रांसफर रुकवाने और मनचाही पोस्टिंग का खेल अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
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