सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
दीपावली के इस पावन पर्व पर हिमाचल प्रदेश के 3.5 लाख कर्मचारियों और 1.70 लाख पेंशनभोगियों की निगाहें सरकार और मुख्यमंत्री पर टिकी हैं। चारों तरफ महंगाई इतनी जोरों पर है कि रसोई से लेकर बाजार तक हर चीज आग के भाव बिक रही है। ऐसे कड़े आर्थिक दौर में कर्मचारियों और पेंशनर्स को इस बात की गहरी आस है कि सरकार इस दिवाली उनकी झोली खाली नहीं रखेगी।
हालांकि, अभी तक डीए की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और वित्त विभाग में डीए की फाइल पर चल रही सुगबुगाहट निराश करने वाली है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग में कुछ ऐसे अफसर कुंडली मारकर बैठे हैं—जो क्लर्क से प्रमोट होकर सीनियर असिस्टेंट, सुपरिंटेंडेंट, सेक्शन ऑफिसर, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी से लेकर जॉइंट सेक्रेटरी तक उसी विभाग में जमे रहे, बैठे रहे और आज रिटायर होने के बाद भी घर जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। ये रिटायर्ड अफसर एक तरफ तो अच्छी-खासी पेंशन अलग ले रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार को उल्टी-पुल्टी सलाह देकर लाखों रुपये महीने की भारी-भरकम कंसल्टेंसी फीस अलग वसूल रहे हैं!
ये वही लोग हैं जो फाइलों में उल्टा-पुल्टा लिखकर, “ऐसा नहीं, ऐसा होगा; ऐसा नहीं, ऐसा हो सकता है; ऐसा नहीं, ऐसा हो जाएगा” जैसी गोलमोल और नकारात्मक बातें भरकर फाइलों को आगे मुख्यमंत्री तक खिसका देते हैं। अपनी जेबें भरने वाले ये अफसर जब भी कर्मचारियों के डीए या एरियर की फाइल इनके पास आती है, तो राज्य के कर्जे और खाली खजाने का रोना रोकर फाइल को उलझा देते हैं।
’पंजाब दस्तक’ द्वारा विभिन्न विभागों के रिटायर्ड अफसरों, पेंशनभोगियों, जॉइंट सेक्रेटरी, सेक्रेटरी और चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ फील्ड में तैनात कई अधिकारियों, सुपरिंटेंडेंट और अन्य कर्मचारियों से बातचीत में यह बात सामने आई कि सरकार को नौकरशाही के इन अड़ंगों से बाहर निकलकर सोचना चाहिए।
इन सबका एक सुर में कहना है कि जनता के बीच जाकर वोट सरकार को लेने हैं, इन अफसरों को नहीं। कर्मचारी और अधिकारी सरकार की रीढ़ की हड्डी हैं। हालांकि सरकार ने ओपीएस (OPS) जैसी बड़ी सौगात दी है, लेकिन आज की इस बेतहाशा महंगाई में सिर्फ ओपीएस से गुजारा नहीं होता। जब मंत्रियों और विधायकों की सैलरी-पेंशन बढ़ाने, उन्हें सस्ती दरों पर कार लोन देने, या नए-नए जिले बनाकर उन पर नए कमीशन बैठाकर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने की बात आती है, तब इन अफसरों को कोई तंगी नजर नहीं आती। लेकिन जब कर्मचारियों के हक की बात आती है, तो यही लोग फाइलों में पन्ने काले करके सबसे बड़ा रोड़ा बन जाते हैं।
बावजूद इसके, प्रदेश के समस्त कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनभोगियों को मुख्यमंत्री से पूरी उम्मीद है कि वे इन अधिकारियों की उल्टी-पुल्टी सलाहों और फाइलों के इस खेल को दरकिनार करेंगे।
कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि वैसे तो बकाया और ड्यू डीए बहुत ज्यादा बनता है और कायदे से पूरा मिलना चाहिए। कर्मचारी सरकार की हर परिस्थिति को समझते हैं और इसीलिए बहुत ज्यादा जिद नहीं कर रहे हैं, लेकिन सरकार को भावना समझकर इस दिवाली पर 8% से लेकर 12% (कम से कम 12%) तक का डीए देना चाहिए, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को इस महंगाई के दौर में राहत मिल सके। अभी तक डीए मिला नहीं है, इसलिए सभी को पूरी उम्मीद है कि घोषणा होने पर यह डीए बढ़कर मिलेगा।
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