शिमला / ब्यूरो रिपोर्ट (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ – पंजाब दस्तक):
हिमाचल प्रदेश के बिजली बोर्ड कर्मचारियों के लिए यह दिवाली खुशियों की नई सौगात लेकर आई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राज्य की कांग्रेस सरकार ने बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित मांग पर मुहर लगाते हुए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करने का ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है।
चौड़ा मैदान की सड़कों पर गूंजी रैलियों की हुंकार, वर्षों का संघर्ष और कर्मचारियों का अटूट धैर्य—आज आखिरकार अपनी मंजिल तक पहुंच गया है। ‘पंजाब दस्तक’ ने कर्मचारियों के इस हक की आवाज को हमेशा प्रमुखता से उठाया था, और आज इस बड़ी जीत पर पूरा बिजली बोर्ड परिवार जश्न मना रहा है।
सुक्खू सरकार की संवेदनशीलता और कर्मचारियों की मेहनत लाई रंग
दिन-रात एक करके राज्य को रोशन करने वाले बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने अपनी न्यायसंगत मांग को पूरी मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों के इस योगदान और अधिकार को समझा और दिवाली से ठीक पहले बंपर तोहफा देकर उनके भविष्य को सुरक्षित कर दिया है। यह फैसला साबित करता है कि जनता और कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा करना ही प्रदेश सरकार की पहली प्राथमिकता है।
मुख्य बिंदु: जानिए ओपीएस बहाली के पूरे नियम और समय-सीमा
पात्रता का दायरा: 15 मई 2023 से पहले विज्ञापित पदों के आधार पर भर्ती हुए सभी पात्र बिजली बोर्ड कर्मचारी ओपीएस के दायरे में आएंगे।
विकल्प चुनने की अंतिम तारीख: केंद्रीय सिविल सेवा नियम 1972 के तहत पात्र कर्मचारियों को 31 अक्टूबर 2026 तक ओपीएस चुनने का एकमुश्त अंतिम अवसर दिया गया है।
अपरिवर्तनीय फैसला: यह विकल्प पूरी तरह अंतिम होगा—यानी एक बार चुनने के बाद इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
जीपीएफ (GPF) की अनिवार्यता: ओपीएस चुनने वाले कर्मचारियों को जीपीएफ का सदस्य बनना होगा। एनपीएस का कर्मचारी अंशदान जीपीएफ में ट्रांसफर होगा, जबकि सरकारी अंशदान व लाभांश सरकारी खाते में समायोजित किया जाएगा।
अंतिम आदेश और खाता बंदी: 31 दिसंबर 2026 को सरकार द्वारा अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे और 28 फरवरी 2027 तक सभी एनपीएस खाते बंद कर दिए जाएंगे।
चौड़ा मैदान के संघर्ष से जीत तक की पूरी कहानी
बिजली बोर्ड प्रबंधन ने इस फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए कसरत तेज कर दी है और सभी जिलों को अंतरिम आदेश जारी किए जा रहे हैं। चौड़ा मैदान में हुई महारैलियों से जो आवाज उठी थी, उस पर सरकार के इस संवेदनशीलता भरे कदम ने मुहर लगा दी है।
देखते रहिए पंजाब दस्तक — सच की आवाज।
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