विशेष समाचार रिपोर्ट
सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक, चंडीगढ़
चंडीगढ़: पंजाब सरकार और राज्य के कर्मचारियों (मुलाजिमों) एवं पेंशनरों के बीच एक बार फिर गहमागहमी का दौर शुरू हो गया है। पंजाब सरकार के मुख्य सचिव (Chief Secretary) की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, आगामी 21 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे पंजाब सचिवालय में ‘मुलाजिम ते पेंशनर सांझा फ्रंट’ और ‘सांझा मुलाजिम मंच’ की लीडरशिप को एक अहम बैठक (मीटिंग) के लिए आमंत्रित किया गया है।
इस बैठक में वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, जनरल एडमिनिस्ट्रेशन के सेक्रेटरी और पर्सनल सेक्रेटरी को भी शामिल रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हड़ताल और बैठक एक ही दिन, असमंजस बरकरार
इस न्योते के सामने आने के बाद कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। दरअसल, राज्य के मुलाजिमों और पेंशनरों ने पहले ही 21 और 22 अक्टूबर को दो दिवसीय सामूहिक हड़ताल कर पूरे सरकारी कामकाज को ठप करने का बड़ा ऐलान किया हुआ है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस दिन हड़ताल का पहला दिन है, उसी दिन सरकार द्वारा बैठक बुलाए जाने से क्या रणनीति अपनाई जाए।
बैठक में इन प्रमुख नेताओं को भेजा गया बुलावा
मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में जिन प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया गया है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
गुरनाम सिंह विर्क (प्रधान, पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन एवं सांझी तालमेल कमेटी)
सचन सिंह खेरा (प्रमुख नेता, सांझा मुलाजिम मंच)
भजन सिंह गिल व करम सिंह तनोवा (पेंशनर नेता)
रंजीत सिंह रानवा (फेडरेशन प्रमुख)
तरसेम सिंह भट्ठल (जनरल सचिव, मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन)
हरजिंदर सिंह पन्नू (टीचर नेता)
जर्मनजीत सिंह व धनवंत सिंह भट्ठल (सांझा फ्रंट)
मनप्रीत सिंह (हेल्थ विभाग व डायरेक्टरेट नेता)
साहिल शर्मा व शशिल कुमार फौजी (पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन)
कुलविंदर सिंह ढिल्लों एवं श्यामलाल शर्मा (रिटायर्ड ऑफिसर एसोसिएशन)
पुरानी बैठकों के ब्योरे पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह विर्क ने तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गत 18 सितंबर को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक की लिखित कार्रवाई (Proceedings/विवरण) सरकार ने अभी तक जारी नहीं की है। उनका कहना है कि जब तक पिछली बैठक के निष्कर्ष सामने नहीं आते, तब तक अगली बैठक का कोई औचित्य नहीं बनता, क्योंकि किसी भी मुद्दे पर आगे की चर्चा पुरानी बैठकों के आधार पर ही संभव है।
नेतृत्व लेगा आपातकालीन बैठक में फैसला
मुलाजिम नेता सचन सिंह खेरा ने इस संबंध में बताया कि इस स्थिति पर विचार करने के लिए ‘सांझी तालमेल कमेटी’, ‘सांझा फ्रंट’ और ‘सांझा मुलाजिम मंच’ की एक आपातकालीन बैठक बुलाई जा रही है। संगरूर में हुई रैली के दौरान मुलाजिमों ने पहले ही संघर्ष का बड़ा ऐलान कर दिया था। अब सभी घटकों की आपसी सहमति के बाद ही यह निर्णय लिया जाएगा कि मुख्य सचिव द्वारा बुलाई गई इस बैठक में शामिल होना है या नहीं और आगामी रणनीति क्या होगी।
