पंजाब दस्तक
वरिष्ठ संवाददाता: प्रियंका (शिमला)
शिमला।एक तरफ हिमाचल प्रदेश ऐतिहासिक आर्थिक तंगी, बजटीय घाटे और हजारों करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के शाही खर्चों ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा मंत्रियों के लिए फिर से लगभग 50-50 लाख रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से नई लग्जरी गाड़ियां खरीदे जाने की खबर सामने आते ही जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। महज 6 महीने के भीतर दूसरी बार लग्जरी वाहनों के इस काफिले को बढ़ाने के फैसले पर अब हर तरफ से तीखे सवाल दागे जा रहे हैं।
क्या मंत्री थोड़ा सबर नहीं कर सकते थे?
हिमाचल प्रदेश की जागरूक जनता और विपक्ष अब सीधे तौर पर सरकार की मंशा और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या मंत्री महोदय पुरानी गाड़ियों में सफर नहीं कर सकते थे? जब प्रदेश का आम नागरिक, कर्मचारी और पेंशनर पाई-पाई का हिसाब मांग रहे हैं, तो मंत्रियों के आराम और रुतबे के लिए इतना उतावलापन क्यों? जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर ऐसी क्या आपातकालीन स्थिति आन पड़ी थी कि सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये फिर से गाड़ियों पर न्योछावर कर दिए गए?
एक तरफ आर्थिक मंदी का रोना… दूसरी तरफ करोड़ों की बर्बादी!
सुखविंदर सिंह सुखु सरकार लगातार मंचों से यह बयान देती आ रही है कि प्रदेश का खजाना खाली है, सरकार कर्ज में डूबी है और विकास कार्यों के लिए पैसे की किल्लत है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार के दावों की हवा निकाल दी है:
कर्मचारियों का डीए (DA) पेंडिंग: प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी लंबे समय से अपने महंगाई भत्ते (DA) की लंबित किस्तों का इंतजार कर रहे हैं।
एरियर और पेंशनरों की करोड़ों की देनदारियां: सेवानिवृत्त पेंशनरों की गाढ़ी कमाई का बकाया एरियर और वित्तीय लाभ सालों से अटके पड़े हैं।
पहले से मौजूद थीं गाड़ियां: रिपोर्ट्स के अनुसार अधिकांश मंत्रियों के पास पहले से ही बेहतरीन स्थिति में सरकारी वाहन उपलब्ध थे। इतना ही नहीं, इसी साल जनवरी महीने में भी चार नई गाड़ियां खरीदी जा चुकी हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब कर्मचारियों और पेंशनरों की जायज देनदारियां चुकता करने के लिए खजाना खाली बताया जाता है, तो फिर इन लग्जरी खर्चों के लिए करोड़ों रुपये कहां से आ रहे हैं?
पंजाब दस्तक के तीखे सवाल: सरकार दे जवाब!
1. जब राज्य कर्ज के समंदर में डूब रहा है, तो मंत्रियों के लिए 50-50 लाख की नई गाड़ियों की तुरंत क्या जरूरत थी?
2. क्या प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के हक का पैसा इन चमचमाती गाड़ियों के पहियों में रौंदा जा रहा है?
3. क्या सरकार को इन गैर-जरूरी और शाही खर्चों पर तुरंत लगाम लगाकर जनता को राहत नहीं देनी चाहिए थी?
आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
’पंजाब दस्तक’ निष्पक्षता और निडरता के साथ जनता के हक की आवाज उठाता रहेगा। कर्ज के बीच लग्जरी खर्च के इस फैसले पर आपकी क्या सोच है?
क्या कर्मचारियों के डीए और पेंशनरों के एरियर को रोककर नई गाड़ियां खरीदना जायज है?
क्या इस तरह के खर्चों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए?
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