ग्राउंड रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
विधानसभा परिसर, शिमला
शिमला (विधानसभा परिसर)।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में उस समय माहौल गरमा गया जब नियम 130 के तहत रोजगार और प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चर्चा शुरू हुई। मुख्यमंत्री की गैर-मौजूदगी में सरकार की ओर से मोर्चा संभालते हुए उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विपक्ष के हर हमले को पूरी ताकत से नाकाम कर दिया। विपक्ष द्वारा रोजगार के वादों को लेकर की जा रही घेराबंदी का करारा जवाब देते हुए उद्योग मंत्री ने दो-टूक कहा कि 5 लाख रोजगार सृजन का संकल्प पूरे 5 वर्ष के कार्यकाल के लिए है।
हर्षवर्धन चौहान ने सदन के पटल पर स्पष्ट किया कि सरकार का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है; पौने चार साल का वक्त बीता है और लगभग सवा साल का समय अभी बाकी है। सरकार पहले चरण में 1 लाख पक्की सरकारी नौकरियां देने के अपने वादे पर पूरी मजबूती से कायम है और तय समयसीमा के भीतर इसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष को नसीहत दी कि वे जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश न करें, क्योंकि विभिन्न विभागों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ चल रही है।
पूर्व भाजपा सरकार को मिले 60 हजार करोड़, फिर भी छोड़ा भारी कर्ज
वित्तीय स्थिति पर विपक्ष को आईना दिखाते हुए हर्षवर्धन चौहान ने पिछली सरकार के वित्तीय प्रबंधन की कलई खोलकर रख दी। उन्होंने आंकड़े रखते हुए कहा कि पूर्व जयराम सरकार को अपने कार्यकाल में केंद्र से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) के रूप में लगभग 48,000 करोड़ रुपये और जीएसटी कंपनसेशन के तौर पर 13,000 करोड़ रुपये मिले। कुल मिलाकर 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम फंड पूर्व सरकार को मिला, फिर भी वह प्रदेश पर 76,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज और कर्मचारियों की 10,000 करोड़ से अधिक की देनदारियां छोड़ गई। वहीं, मौजूदा कांग्रेस सरकार को आरडीजी मद में महज 17,000 करोड़ रुपये मिले हैं और जीएसटी मुआवजा भी केंद्र ने बंद कर दिया है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार वित्तीय अनुशासन बनाकर प्रदेश के विकास को नई दिशा दे रही है।
मल्टी टास्क वर्करों के मानदेय पर घेरा
जल शक्ति और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर्स (MTW) के मुद्दे पर उद्योग मंत्री ने कहा कि इन श्रेणियों की शुरुआत पिछली भाजपा सरकार ने नाममात्र मानदेय पर की थी। वर्तमान सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इनके मानदेय में ₹500 की बढ़ोतरी कर इसे ₹6,000 तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विभागों के मल्टी टास्क वर्करों के लिए न्यूनतम वेतन (Minimum Wages) के दायरे में एक समान और स्थायी नीति लाने पर काम कर रही है।
खनन राजस्व और पर्यावरण संतुलन पर स्थिति साफ
राज्य के आंतरिक संसाधन जुटाने पर बोलते हुए उद्योग मंत्री ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के माध्यम से प्रदेश को करीब ₹110 करोड़ का फंड मिल रहा है और खनन गतिविधियों से राज्य को प्रतिमाह लगभग ₹450 करोड़ का राजस्व आधार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वैज्ञानिक और पारदर्शी खनन नीति लागू की है। एनजीटी और पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन कराते हुए माइनिंग गहराई और मानकों को वैज्ञानिक रूप दिया गया है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों पर अवैध खनन के खिलाफ बड़ा अभियान चलाकर हजारों चालान किए गए हैं, जिससे अवैध दोहन पर पूरी तरह लगाम कसी गई है।
औषधीय खेती: नशे के लिए नहीं, मेडिकल उपयोग और किसानों के हित में नीति
भांग की नियंत्रित खेती पर विपक्ष की आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए उद्योग मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके लिए पुख्ता नियम बनाए गए हैं। यह नीति नशे को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं में उपयोग होने वाले सीबीडी (CBD) ऑयल और औषधीय उत्पादों (मेडिसिनल व इंडस्ट्रियल पर्पज) के लिए लाई गई है। पूरी प्रक्रिया कड़े प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगी, जिससे इसका कोई दुरुपयोग न हो सके और प्रदेश के किसानों को वैध आमदनी का बड़ा जरिया मिल सके।
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