बीजेपी सांसदों द्वारा राष्ट्रीय सवर्ण आयोग की मांग

बीजेपी के अंदर सुलग उठी बगावती चिंगारी! कोर वोटर की बेरुखी से सहमे बीजेपी सांसद, मंत्रियों के दरबार में रखी दो-टूक मांग: जब SC-ST-OBC कमीशन तो ‘राष्ट्रीय सवर्ण आयोग’ क्यों नहीं?

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​ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
पंजाब दस्तक, चंडीगढ़ न्यूज़ रूम


​भारतीय जनता पार्टी के पारंपरिक और सबसे वफादार ‘कोर वोटर’ यानी सवर्ण समाज की खामोश नाराजगी ने अब सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जमीनी हकीकत और चुनावी समीकरणों की नब्ज भांपते हुए बीजेपी के ही कई दिग्गज सांसदों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सांसदों ने सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के सामने स्पष्ट और दो-टूक शब्दों में देश में ‘राष्ट्रीय सवर्ण आयोग’ के गठन की मांग रख दी है।


​जब SC, ST और OBC आयोग हैं तो सवर्णों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
​मंत्रियों के साथ हुई बंद कमरे की बैठक में सांसदों ने तीखे तर्क रखे। सांसदों का सीधा सवाल था कि जब देश में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की समस्याओं और हकों के लिए अलग-अलग संवैधानिक आयोग काम कर सकते हैं, तो सवर्ण समाज की सुध लेने के लिए राष्ट्रीय सवर्ण आयोग का गठन क्यों नहीं हो सकता? सांसदों ने साफ कहा कि जब बिहार जैसे राज्य में सवर्ण आयोग बन सकता है, तो फिर राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करने में केंद्र सरकार को किस बात की हिचकिचाहट है?


​यूजीसी गाइडलाइंस और कोर वोटर के तीखे सवाल
​सूत्रों के मुताबिक, सांसदों ने मंत्रियों को जमीनी हकीकत का आईना दिखाते हुए चेताया कि जब वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में जनता के बीच जाते हैं, तो सवर्ण समाज खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है। यूजीसी (UGC) गाइडलाइंस से लेकर तमाम नीतिगत फैसलों पर सवर्ण तबका खुद को उपेक्षित और हाशिए पर महसूस कर रहा है। चुनावी समीक्षाओं का हवाला देते हुए यह भी रेखांकित किया गया कि जहां-जहां सवर्ण वोटरों ने पार्टी से किनारा किया, वहां पार्टी को अप्रत्याशित नुकसान झेलना पड़ा है।


​आगामी चुनावों से पहले डैमेज कंट्रोल की कवायद
​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश समेत आगामी चुनावी रण में इस वर्ग की उपेक्षा बीजेपी को भारी पड़ सकती है। सांसदों का साफ कहना है कि अगर समय रहते सवर्णों की समस्याओं, शिकायतों और सामाजिक-आर्थिक चिंताओं की सुनवाई के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय मंच नहीं दिया गया, तो कोर वोटर का भरोसा बहाल करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में राष्ट्रीय सवर्ण आयोग का गठन न केवल इस वर्ग का हौसला बढ़ाएगा, बल्कि सत्तापक्ष के प्रति विश्वास को भी मजबूती देगा।


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