विधानसभा परिसर से सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ की विशेष रिपोर्ट
शिमला (पंजाब दस्तक):
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दसवां और अंतिम दिन केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सदन के भीतर सियासी तपिश और प्रशासनिक अनुशासनहीनता का बड़ा अखाड़ा बन गया। सत्र के समापन पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने जहां सरकार के सियासी भविष्य पर सीधा वार किया, वहीं सदन की गरिमा को ताक पर रखने वाली अफसरशाही की मनमानी पर भी जमकर क्लास लगाई।
‘समय किसी के लिए नहीं ठहरता’—2027 की वापसी का खुला ऐलान
सत्र के समापन अवसर पर धन्यवाद भाषण के दौरान जयराम ठाकुर के तेवर पूरी तरह आक्रामक नजर आए। सुक्खू सरकार पर तीखा तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यदि यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर भी पाई, तो अब इनके पास सिर्फ एक मानसून सत्र ही बाकी बचा है। चुनावी उल्टी गिनती शुरू होने का संकेत देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने दो टूक कहा, “वक्त किसी के लिए नहीं ठहरता; जो पहिया पहले घूमा था, वह फिर घूमेगा। आज हालात साफ बयां कर रहे हैं कि विपक्ष सत्ता की तरफ कदम बढ़ा रहा है और मौजूदा सत्ता पक्ष विदाई की कगार पर है।” उन्होंने 2027 में भाजपा की प्रचंड वापसी का दावा ठोकते हुए सरकार को जमीनी हकीकत का आईना दिखाया।
सदन से शीर्ष अफसरशाही नदारद: खाली दीर्घा पर फूटा गुस्सा
सियासी हमलों के बीच सबसे बड़ा बखेड़ा सदन की ‘अधिकारी दीर्घा’ (Officers’ Gallery) को लेकर खड़ा हुआ। सत्र के आखिरी दिन जब सदन की कार्यवाही चल रही थी, तब आला नौकरशाही की सीटें पूरी तरह खाली पड़ी थीं। इस घोर लापरवाही को सदन की गरिमा के खिलाफ बताते हुए जयराम ठाकुर ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री का किसी जरूरी काम से निकलना समझा जा सकता है, लेकिन चीफ सेक्रेटरी, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और प्रशासनिक सचिवों का सत्र के समापन मौके पर सदन से गायब रहना संसदीय परंपराओं का सीधा अपमान है। चंद कनिष्ठ अधिकारियों को पीछे बिठाकर औपचारिकता पूरी कर ली गई, जो बेहद अशोभनीय है।
विधानसभा अध्यक्ष के पाले में गेंद: स्पीकर ने दिया संज्ञान लेने का भरोसा
प्रशासनिक अमले की इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली पर नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से तुरंत हस्तक्षेप करने और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस चूक को हल्के में नहीं लिया और सदन को भरोसा दिलाया कि शीर्ष अधिकारियों की इस गैर-मौजूदगी पर कड़ा संज्ञान लिया जाएगा।
सत्र भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन अंतिम दिन नौकरशाही की बेपरवाही और विपक्ष के तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत और भी ज्यादा गरमाने वाली है।
सच्ची, बेबाक और सबसे तेज ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए देखते रहें पंजाब दस्तक। निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करना न भूलें।

