विशेष रिपोर्ट: वरिष्ठ पत्रकार मीरा महाजन (पंजाब दस्तक)
अफ़सरशाही पर कड़ा प्रहार: फाइलों पर पंख बनाकर बैठने वाली नौकरशाही पर कसी गई नकेल।
दवा खरीद में देरी पर एक्शन: स्वास्थ्य मंत्री ने सचिव को नोटिस जारी कर मांगी सख्त और समयबद्ध रिपोर्ट।
’पंजाब दस्तक’ का सीधा सवाल: क्या देश के सभी राज्यों में अफसरों की ऐसी ही सीधी जवाबदेही और सख्ती तय होनी चाहिए?
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। सरकारी अस्पतालों में आम जनता को दवाओं की कोई कमी या किल्लत न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने अत्यंत सख्त रुख अख्तियार किया है। दवा खरीद प्रक्रिया में बेवजह की देरी और हीला-हवाली को लेकर मंत्री ने सीधे विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है।
फाइलों पर पंख बनाकर बैठती है अफसरशाही: विशेष विश्लेषण
हमारे विस्तृत विश्लेषण में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि अक्सर अफसरशाही अति-आवश्यक फाइलों पर ‘पंख बनाकर’ बैठ जाती है। प्रशासनिक मेजों पर महीनों तक फाइलें अटकी रहती हैं और नीतिगत फैसले लटके रहते हैं। जब मामला स्वास्थ्य सेवाओं और जीवनरक्षक दवाओं का हो, तो इस ढिलाई और लालफीताशाही का सीधा खामियाजा अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब और आम मरीजों को भुगतना पड़ता है।
दिल्ली सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि अब जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और प्रशासनिक सुस्ती को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
’पंजाब दस्तक’ का बड़ा सवाल
क्या देश के अन्य सभी राज्यों को भी इसी तर्ज पर नौकरशाही पर शिकंजा कसना चाहिए?
जब तक फाइलों को अटकाने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक क्या व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव है?
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