भेषज, वरिष्ठ पत्रकार, चंबा
चंबा: हिमाचल प्रदेश के चंबा नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर छिड़ी राजनीतिक खींचतान अब कानूनी लड़ाई में बदल गई है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में एक विधायक के मतदान करने के मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए चुनाव परिणामों के संचालन, शपथ ग्रहण और पदभार ग्रहण की पूरी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।
विवाद की जड़: विधायक का वोट बना मुद्दा
यह पूरा विवाद 4 जून को हुए नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव से जुड़ा है। नवनिर्वाचित पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान एक विधायक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो हिमाचल प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1994 और नगरपालिका चुनाव नियम 2015 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि विधायक के अवैध मतदान ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है, इसलिए पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर केवल 11 निर्वाचित पार्षदों के माध्यम से नए सिरे से चुनाव करवाए जाने चाहिए।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख और अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पूर्व के एक आदेश का हवाला देते हुए प्रथम दृष्टया माना है कि नगर निकायों के चुनाव में पदेन सदस्यों (विधायक) को मतदान की अनुमति देना कानून के विपरीत हो सकता है।
कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अब पूरे चंबा की नजरें 15 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि नगर परिषद की सत्ता की बागडोर किसके हाथ में होगी।
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