पंजाब दस्तक / ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा
शिमला (विधानसभा से ग्राउंड रिपोर्ट): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में वीरवार को उस समय एक बड़ा और ऐतिहासिक सियासी मोड़ देखने को मिला, जब प्रदेश में निर्माणाधीन व संचालित जल-विद्युत परियोजनाओं के सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभावों, जल-अधिकारों और लाडा (LADA) फंड के बकाये को लेकर लाया गया अशासकीय संकल्प सदन में सर्वसम्मति से पारित हो गया। विपक्ष की ओर से डॉ. जनक राज द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच दो घंटे से अधिक समय तक तीखी नोकझोंक और राजनीतिक तकरार चली, लेकिन अंततः हिमाचल के जल-जंगल-जमीन और वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए पूरा सदन एक सुर में खड़ा नजर आया।
जयराम ठाकुर का तीखा वार: ‘एक तरफ लाभ ले रहे हो, दूसरी तरफ केंद्र का धन्यवाद तक नहीं करते’
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन में खड़े होकर मुख्यमंत्री के आक्रामक रुख पर कड़ा एतराज जताया।
जयराम ठाकुर ने दो टूक कहा:
सदन को जनसभा न बनाएं: मुख्यमंत्री सदन के गरिमामयी पटल को चुनावी जनसभा में तब्दील करने की कोशिश न करें।
केंद्रीय नेतृत्व की विशेष भूमिका और आभार: जयराम ठाकुर ने कहा कि किशाऊ प्रोजेक्ट से लेकर लाडा और पावर प्रोजेक्ट्स के जितने भी फैसले हुए हैं, उनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर की विशेष भूमिका व सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है।
दोहरा रवैया अस्वीकार्य: उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “एक तरफ आप केंद्र सरकार से बड़े-बड़े लाभ ले रहे हैं, और दूसरी तरफ उनका धन्यवाद करने के बजाय ऐसा पेश कर रहे हैं जैसे केंद्र आपकी उंगलियों पर चल रहा हो। जो केंद्र आपकी बात सुनकर प्रदेश के हित में फैसले ले रहा है, उसका खुले दिल से आभार जताया जाना चाहिए।”
CM सुक्खू का करारा पलटवार: ‘तर्कों से लिया है हक, हमने खुले दिल से जताया आभार’
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने हमेशा केंद्र के सहयोग का मान रखा है और सदन में भी संबंधित मंत्रियों का धन्यवाद किया है, लेकिन हक मांगने में कभी झिझक नहीं दिखाई:
कानूनी मजबूती से मिली जीत: मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के समक्ष तथ्यों और एफिडेविट के साथ मजबूत पैरवी की गई, जिसके दम पर हिमाचल को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली का ऐतिहासिक अधिकार मिला। साथ ही विधायक अनुराधा राणा की मांग पर प्रोजेक्ट के डिजाइन में जरूरी संशोधन पर भी केंद्र की सहमति बनी।
ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का धन्यवाद: मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005-06 से लंबित 1% लाडा फंड को लेकर जब उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने पक्ष रखा, तो उन्होंने हिमाचल के दावे को पूरी तरह स्वीकार किया। एसजेवीएनएल के 1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी प्रोजेक्ट सहित अन्य परियोजनाओं से पुराना एरियर वसूलने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पूर्व ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह का भी आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी और पोंग डैम क्षेत्रों में पेयजल व सिंचाई के लिए लगने वाली एनओसी की पुरानी बंदिशों को खत्म करवाया गया।
40 साल पूरे कर चुके प्रोजेक्ट्स की वापसी (चमेरा-1 पर बड़ा ऐलान): मुख्यमंत्री ने राज्य की आमदनी बढ़ाने के लिए बड़ा दांव चलते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों (World Practice) के तहत 40 वर्ष की लीज पूरी होने पर प्रोजेक्ट मूल राज्य को वापस मिलना चाहिए। 540 मेगावाट के ‘चमेरा-1’ को 40 से 43 साल बीत चुके हैं। अब सरकार ऐसे सभी पुराने प्रोजेक्ट्स की वापसी और अपने पूरे वित्तीय अधिकार लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ रही है।
विपक्ष की आंतरिक खींचतान पर तंज: मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्ष की असल परेशानी सरकार के तर्कों से नहीं, बल्कि अपने 5 गुटों और अंदरूनी कुर्सी की दौड़ की वजह से है।
लाडा वसूली पर कानून का डंडा और प्रस्ताव पर सर्वसम्मति की मुहर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चंबा जिले सहित पूरे प्रदेश में लाडा फंड की पाई-पाई वसूलने के लिए विधानसभा अध्यक्ष महोदय के कानूनी ज्ञान व अनुभवों का पूरा सहयोग लिया जाएगा और कंपनियों से बकाया राशि कानून व सख्ती के दम पर वसूली जाएगी।
तीखी राजनीतिक बहसों और तीखे बयानों के बाद जब बात हिमाचल के अधिकारों की आई, तो सरकार ने विपक्ष के संकल्प को खुले दिल से स्वीकार किया और पूरे सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर केंद्र और विद्युत कंपनियों को प्रदेश की एकजुटता का कड़ा संदेश दिया।
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