ग्राउंड रिपोर्ट: विधानसभा परिसर, शिमला से पंजाब दस्तक ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के पटल पर आज ग्रामीण गरीबों की छत, निर्माण की बढ़ती लागत और आपदा पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर बेहद गंभीर और धारदार बहस देखने को मिली। पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर द्वारा सदन में लाए गए गैर-सरकारी संकल्प पर सत्तापक्ष और विपक्ष ने दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर एक सुर में आवाज बुलंद की। बड़सर से विधायक इंद्रदत्त लखनपाल सहित कई वरिष्ठ सदस्यों ने इस जनहितैषी प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया। मामले की संवेदनशीलता और जमीनी हकीकत को देखते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (RD) मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सरकार की ओर से पूर्ण सहमति जताई, जिसके बाद पूरे सदन ने एक स्वर में ध्वनिमत से संकल्प पारित कर भारत सरकार को विस्तृत सिफारिश भेजने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
सदन में पेश हुए तकनीकी व वित्तीय आंकड़े: 2016-17 से आज तक का जमीनी विश्लेषण
सदन में पूर्ववर्ती ‘इंदिरा आवास योजना’ के स्थान पर वर्ष 2016-17 से शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ (PMAY-G) के वित्तीय और संरचनात्मक मानकों पर विस्तार से आंकड़े रखे गए:
वित्तीय आवंटन की सीमा: योजना के तहत मैदानी क्षेत्रों के लिए ₹1,20,000 और पहाड़ी व पूर्वोत्तर दुर्गम क्षेत्रों के लिए ₹1,30,000 की सहायता तय है।
अभिसरण (Convergence) का गणित: न्यूनतम 25 वर्ग मीटर (रसोई सहित) के निर्माण के लिए मनरेगा के तहत 90 से 95 दिनों की अकुशल मजदूरी (लगभग ₹18,000 से ₹20,000) तथा स्वच्छ भारत मिशन से ₹12,000 शौचालय निर्माण के लिए दिए जाते हैं।
लागत और महंगाई की मार: सदन में रेखांकित किया गया कि सामाजिक-आर्थिक व जाति जनगणना (SECC) और आवास+ सर्वे के तहत चयनित पात्र गरीब परिवारों के लिए आज के दौर में ₹1.30 लाख से ₹1.50 लाख की राशि में पक्का ढांचा खड़ा करना असंभव है। सीमेंट, सरिया, रेत, बजरी और पहाड़ी इलाकों में ढुलाई की भारी लागत के कारण 3 से 4 किश्तों में मिलने वाली यह रकम निर्माण कार्य को बीच में ही अटका देती है, जिससे गरीब परिवार कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
बिक्रम सिंह ठाकुर ने पुरजोर तरीके से उठाया मुद्दा:
सदन में संकल्प पेश करते हुए पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि पहाड़ी भूगोल में ₹1.30 लाख की राशि ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रही है। उन्होंने सत्तापक्ष से अपील की कि प्रदेश के गरीबों के हित में सदन से सर्वसम्मति से केंद्र सरकार को आधिकारिक प्रस्ताव भेजकर इस सहायता राशि को कम से कम दोगुना या तीन गुना करने की मांग की जाए।
विधायक इंद्रदत्त लखनपाल व अन्य सदस्यों की मजबूत पैरवी:
हमीरपुर के बड़सर से विधायक इंद्रदत्त लखनपाल और अन्य विधायकों ने इस प्रस्ताव पर तुरंत सहमति जताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण लागत कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में केंद्र के पुराने नियमों के कारण गरीब परिवारों को पक्की छत नहीं मिल पा रही है। उन्होंने सदन से एकमत होकर इस प्रस्ताव को केंद्र भेजने की जोरदार वकालत की।
2023 आपदा राहत पैकेज का उदाहरण और मंत्री अनिरुद्ध सिंह का ऐलान:
चर्चा का जवाब देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि गरीबों के सिर पर पक्की छत का मुद्दा राजनीति से पूरी तरह परे है। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि वर्ष 2023 की भीषण प्राकृतिक आपदा के समय भी प्रदेश सरकार ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की थी। केंद्र के पुराने नियमों के तहत जहां पूर्ण क्षतिग्रस्त मकान पर महज ₹1.30 लाख मिलते थे, वहीं राज्य सरकार ने अपने वित्तीय संसाधनों से विशेष पैकेज देकर इसे सीधे ₹7 लाख किया था।
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सदन के पटल पर घोषणा की कि राज्य सरकार बिक्रम सिंह ठाकुर द्वारा लाए गए इस संकल्प को पूर्ण समर्थन देती है। उन्होंने ऐलान किया कि हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भारत सरकार (केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय) को एक आधिकारिक व विस्तृत सिफारिश पत्र भेजा जाएगा, ताकि पहाड़ी राज्यों के लिए PMAY-G की वित्तीय सीमा में तत्काल व्यावहारिक बढ़ोतरी की जा सके।
ध्वनिमत से प्रस्ताव पास:
मंत्री अनिरुद्ध सिंह के सकारात्मक जवाब के बाद पूरे सदन ने एक स्वर में ध्वनिमत से इस संकल्प को पारित कर दिया। इस दौरान पीठासीन अधिकारी ने समय सीमा का ध्यान दिलाते हुए सदस्यों से संक्षेप में बात रखने का आग्रह किया, जिसके बाद अत्यंत सकारात्मक माहौल में यह ऐतिहासिक निर्णय दर्ज हुआ।
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