ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा | पंजाब दस्तक
हिमाचल प्रदेश। हिमाचल की पंचायतों में विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार पर अब बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार के ‘ई-ग्राम स्वराज’ पोर्टल के आंकड़ों ने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में खलबली मचा दी है। प्रदेश की 647 पंचायतें 14वें वित्त आयोग के तहत मिला करोड़ों का बजट पिछले 7 वर्षों में खर्च ही नहीं कर पाई हैं, जिससे अब अगली किस्तों पर भी संकट के बादल छा गए हैं।
शपथ ग्रहण के बाद ‘विकास का मंत्र’ ही प्राथमिकता
आगामी 15 तारीख को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के बाद, जनता की ओर से नवनियुक्त प्रतिनिधियों के लिए स्पष्ट संदेश है। जनता जानना चाहती है कि आखिर क्यों सालों से पैसा फाइलों में दबा रहा? अब शपथ लेने वाले सभी प्रधानों और उप-प्रधानों को प्रशासन को यह समझाना होगा:
जनता की अपील: ओथ सेरेमनी के तुरंत बाद, ब्लॉक स्तर पर प्रधानों की विशेष बैठक हो, जहाँ उन्हें केंद्र से आई हर स्कीम का हिसाब और उसे खर्च करने की प्रक्रिया समझाई जाए।
विकास का संकल्प: हर वार्ड के पंच और उप-प्रधान मिलकर ग्राम सभाएं बुलाएं। पैसा लैप्स होना न केवल लापरवाही है, बल्कि यह गरीब जनता के हक का अपमान है।
सर्टिफिकेट अनिवार्य: प्रशासन सुनिश्चित करे कि प्रधान विकास कार्यों का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) समय पर जमा करें ताकि केंद्र से अगली किश्त मिलने में कोई रुकावट न आए।
सरकार का अल्टीमेटम: ‘काम करो, वरना जवाब दो’
विकास कार्यों के प्रति बरती गई 7 साल की यह सुस्ती अब महंगी पड़ सकती है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब रस्म अदायगी नहीं, बल्कि ‘काम’ देखा जाएगा। यदि भविष्य में बजट लैप्स हुआ, तो जवाबदेही तय होगी। जनता ने प्रशासन से अपील की है कि वे ब्लॉक दफ्तरों में सक्रियता बढ़ाएं और नए प्रतिनिधियों का मार्गदर्शन करें ताकि हिमाचल के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुँच सके।
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- पंजाब दस्तक ब्यूरो चीफ, सुरेंद्र राणा
