किसान आंदोलन से टूटी थी अकाली दल व बीजेपी की यारी, अब फिर साथ आने की त्यारी

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पंजाब दस्तक, दरअसल शिरोमणी अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल  ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का फैसला किया है. चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिस तरह से सिख समुदाय के ऊपर अत्याचार किए हैं उसे देखते हुए हम कांग्रेस के साथ कभी नहीं जाएंगे.

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार को पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल से बात की थी और राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के लिए समर्थन मांगा था.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फोन पर हुई इस बातचीत के दौरान बादल ने नड्डा को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया था लेकिन उन्होंने कहा कि अकाली दल के नेताओं से चर्चा करने के बाद उन्हें अपनी राय से अवगत करा देंगे.

राष्ट्रपति पद की राजग उम्मीदवार के रूप में मुर्मू द्वारा नामांकन दाखिल करने के बाद से जेपी नड्डा विभिन्न गैर-राजग दलों से फोन पर बात कर रहे हैं और उनसे मुर्मू के लिए समर्थन मांग रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि अकाली दल राष्ट्रपति चुनाव में मुर्मू का समर्थन कर सकता है. ज्ञात हो कि केंद्र सरकार के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल राजग से बाहर हो गया था और उसकी नेता हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. साथ ही दशकों पुराना दोनों दलों को गठबंधन टूट गया था.

बसपा ने पहले ही द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का वादा कर दिया है

इससे पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी स्पष्ट करते हुए कहा कि सिर्फ अनुसूचित जनजाति की महिला होने के कारण ही उनकी पार्टी ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव के लिए समर्थन देने का ऐलान किया है और इसे सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की हिमायत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

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