शिमला में 2016-22 के पेंशनरों की बैठक में लंबित वित्तीय लाभों की मांग उठाई गई।

​व्यवस्था परिवर्तन में अपने ही हक को तरस रहे 2016-22 के पेंशनर्स: चहेतों पर मेहरबान सुखू सरकार, जवानी देने वाले बुजुर्गों के साथ यह छल क्यों?

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पंजाब दस्तक
शिमला (हिमाचल प्रदेश)
​विशेष रिपोर्ट: सुरेंदर राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)


​संस्कृत श्लोक:
वृद्धा यत्र न पूज्यन्ते, न तत्र श्रीः स्थिरा भवेत्।
कृतघ्नता समं पापं, नास्ति लोके जगत्तये॥
(अर्थ: जिस समाज या व्यवस्था में बुजुर्गों और ज्येष्ठ नागरिकों का सम्मान नहीं होता, वहाँ लक्ष्मी और समृद्धि कभी स्थिर नहीं रहती। जीवन भर सेवा करने वालों के समर्पण को भूल जाना और उनके अधिकारों से वंचित रखना सबसे बड़ा पाप है।)
​पूरी उम्र सेवा में खपाने वालों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?


शिमला: हिमाचल प्रदेश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का झंडा बुलंद करने वाली सुखविंदर सिंह सुखू सरकार की नीतियां आज राज्य के लाखों पेंशनरों के गले की फांस बन चुकी हैं। जीवन का स्वर्णिम काल, अपनी पूरी जवानी, ऊर्जा और निष्ठा राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सींचने में लगाने वाले वरिष्ठ नागरिक आज बुढ़ापे के इस संवेदनशील पड़ाव में अपने ही न्यायसंगत अधिकारों—ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, कम्यूटेशन और डीए एरियर—के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।


​पंजाब दस्तक की सीधी और तीखी समीक्षा में यह बड़ा सवाल सामने आता है कि एक तरफ सुखू सरकार अपने पसंदीदा और चहेते अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद भी धड़ाधड़ एक्सटेंशन (सेवा विस्तार) देकर खजाने की तिजोरी खोले बैठी है, वहीं दूसरी तरफ वर्ष 2016 से 2022 के मध्य सेवानिवृत्त हुए हजारों पेंशनरों के खून-पसीने की कमाई को रोके खड़ी है।


​2016 से 2022 के रिटायर्ड पेंशनरों का पूरा सच: आखिर क्या था इनका गुनाह?
​क्या 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त होना कोई अपराध था?
​वर्तमान में जो कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं, उन्हें उनके पूरे वित्तीय लाभ मिल रहे हैं, यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है—वे भी हमारे ही भाई हैं। परंतु सवाल यह है कि 2016 से 2022 के बीच सेवामुक्त हुए पेंशनरों ने ऐसा क्या गुनाह किया था कि उन्हें रिवाइज्ड पे-स्केल के एरियर, लीव एनकैशमेंट और अन्य लाभों से पूरी तरह वंचित रखा जा रहा है?


​जिस उम्र में बुजुर्गों को सम्मान, शांति और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत होती है, उस उम्र में सुखू सरकार की वादाखिलाफी उन्हें सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए विवश कर रही है।


​कसूमटी के बाद टू-टू में फूटा आक्रोश: लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में हुंकार
​सोमवार को कसूमटी में संपन्न हुई बैठक के बाद, आज पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (ब्लॉक टू-टू, जिला शिमला) की त्रैमासिक बैठक लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में पूरी एकजुटता के साथ आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता टू-टू ब्लॉक के अध्यक्ष सत्य प्रकाश शर्मा ने की।
​श्रद्धांजलि: बैठक की शुरुआत में विगत दिनों दिवंगत हुए पेंशनर साथियों की स्मृति में 2 मिनट का मौन धारण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


​एजेंडा प्रपोजल: एसोसिएशन के महासचिव योगराज शर्मा ने हाउस के समक्ष पेंशनरों के ज्वलंत मुद्दों और मांगों का एजेंडा रखा।
​मुख्य अतिथि: हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
​साइबर फ्रॉड से बचाव की जानकारी: हेल्प एज ग्रुप के प्रभारी रंजीत राठौर ने कसूमटी बैठक की तर्ज पर वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड, सट्टेबाजी और ऑनलाइन ठगी के गिरोहों से सतर्क रहने के व्यावहारिक उपाय बताए।


​31 जुलाई की मियाद खत्म: मुख्यमंत्री के आश्वासन की निकली हवा
​मुख्य अतिथि भूपराम वर्मा ने सरकार की वादाखिलाफी पर कड़ा प्रहार करते हुए खुलासा किया कि संयुक्त संघर्ष समिति के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता में स्वयं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने यह ठोस आश्वासन दिया था कि 31 जुलाई से पूर्व 1 जनवरी 2016 से 31 जुलाई के मध्य सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को 40% लीव एनकैशमेंट व बकाए भुगतान की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
​”31 जुलाई की समय-सीमा बीत चुकी है, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। 15% डीए, कम्यूटेशन, लीव एनकैशमेंट और ग्रेच्युटी की अदायगी न करके सरकार पेंशनरों के धैर्य की परीक्षा ले रही है।”


भूपराम वर्मा (अतिरिक्त महासचिव, संयुक्त संघर्ष समिति)
​8 अगस्त को शाहपुर (कांगड़ा) में आर-पार का शंखनाद
​महासचिव योगराज शर्मा और अन्य वक्ताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि पेंशनरों का यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। शिमला के चौड़ा मैदान और धर्मशाला में आयोजित सफल आक्रोश रैलियों के बाद अब आंदोलन का मुख्य केंद्र कांगड़ा बनेगा।
​तारीख: 8 अगस्त 2026
​स्थान: शाहपुर (जिला कांगड़ा)
​रणनीति: प्रदेश भर से हजारों की संख्या में पेंशनर शाहपुर पहुँचकर महासम्मेलन करेंगे और सरकार के खिलाफ आर-पार के उग्र आंदोलन की भावी रूपरेखा तय करेंगे।


​बैठक में गरिमापूर्ण उपस्थिति
​इस महत्वपूर्ण आयोजन में हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी सेन राम नेगी, ब्लॉक वरिष्ठ सलाहकार राजेश भंडारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालकृष्ण वर्मा, उपाध्यक्ष मस्तराम पवार, प्रधान वरिष्ठ नागरिक (टू-टू) के.एल. अग्रवाल एवं सचिव जगदेव गर्ग सहित दर्जनों वरिष्ठ पेंशनर उपस्थित रहे।


​पंजाब दस्तक की बेबाक बात: क्या जागेगी सुखू सरकार?
​पेंशनरों का हक कोई खैरात नहीं, बल्कि उनके जीवन भर के परिश्रम का फल है। यदि सुखू सरकार ने समय रहते 2016 से 2022 के पेंशनरों की पीड़ा को नहीं समझा और उनके जायज हक नहीं दिए, तो 8 अगस्त को शाहपुर (कांगड़ा) से उठने वाला जनाक्रोश प्रदेश की राजनीति और सरकार की स्थिरता पर भारी पड़ेगा।


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