बगदाद में अमरीकी दूतावास पर हमला; हेलिपैड के पास गिरी मिसाइल, धू-धू कर जला परिसर 

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विदेश: मिडल ईस्ट में अमरीका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। शनिवार को इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमरीकी दूतावास परिसर पर ड्रोन हमले की घटना सामने आई। ईराकी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, दूतावास के अंदर बने हेलिपैड के पास एक मिसाइल गिरी, जिसके बाद परिसर से धुआं उठता देखा गया। इससे पहले सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर खड़े अमरीकी वायुसेना के पांच केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर विमान ईरान के मिसाइल हमले में क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी। ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातामी ने चेतावनी दी है कि युद्धपोत ‘आईरिस डेना’ पर सवार 104 क्रू सदस्यों की हत्या का जवाब जरूर दिया जाएगा। हातामी ने कहा कि यह जहाज एक शांतिपूर्ण मिशन पूरा करके ईरान लौट रहा था, तभी हिंद महासागर में उस पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि इन नाविकों का बलिदान साहस का प्रतीक बना रहेगा, क्योंकि ईरान अपनी नौसैनिक शक्ति को और मजबूत करने की कसम खाता है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमरीका, रूस से तेल इंपोर्ट बंद करने के लिए भारत को धमकाने के बावजूद, अब ईरान के साथ अपने युद्ध के दो हफ्ते बाद, उनसे मॉस्को से कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है। अराघची ने कहा कि अमरीका ने भारत को रूस से तेल इंपोर्ट बंद करने के लिए धमकाने में महीनों बिताए। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध के बाद, व्हाइट हाउस अब दुनिया – जिसमें भारत भी शामिल है – से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है। बता दें कि पांच मार्च को अमरीका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अनुमति दी है, जबकि उससे पहले उसने अतिरिक्त टैरिफ लगाया हुआ था। 15 दिनों की भीषण जंग के बीच ईरान ने अमरीका को बड़ी धमकी दी है। ईरान ने कहा है कि वह अमरीका से जुड़ी तेल सुविधाओं को राख का ढेर बना देगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल ढांचे पर हमले जारी रहे तो मिडल-ईस्ट क्षेत्र में अमरीकी कंपनियों से जुड़ी सभी प्रमुख तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा, जिससे वे राख का ढेर बन जाएंगी। इस बीच भारत में ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अमरीका से बातचीत नहीं करना चाहता, क्योंकि इस जंग की शुरुआत उन्होंने ही की थी। हमें उनके साथ अब तक दो बार ऐसा अनुभव हो चुका है। हम उनसे बातचीत कर रहे थे और उन्होंने हम पर हमला कर दिया। हमें अपनी रक्षा करनी होगी। हम अपनी गरिमा, अपनी स्वतंत्रता और अपने देश के लिए अपना खून बहाने को तैयार हैं। हम अपने दुश्मनों के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। हम इस युद्ध के अंत तक डटे रहेंगे। ट्रंप ने कहा था ईरान बातचीत करना चाहता है, लेकिन बातचीत की इच्छा के बावजूद अमरीका ईरान पर हमला जारी रखेगा।

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