कांग्रेस राज में खुद कांग्रेस विधायक परेशान—किसानों-बागवानों की हालत बदहाल”: संदीपनी भारद्वाज“ओलावृष्टि से नुकसान, महंगाई से मार—अपनी ही सरकार से राहत मांग रहे कांग्रेस नेता

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शिमला, सुरेन्द्र राणा;भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने ठियोग से कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण स्थिति है कि कांग्रेस राज में अब खुद कांग्रेस के विधायक ही अपनी सरकार से राहत की गुहार लगा रहे हैं।संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि“आज प्रदेश में ऐसी स्थिति बन गई है कि कांग्रेस के अपने नेता ही किसानों और बागवानों की दुर्दशा को उजागर कर रहे हैं—यह सरकार की पूर्ण विफलता का प्रमाण है।”उन्होंने कहा कि जिला शिमला सहित प्रदेश के कई हिस्सों में ओलावृष्टि से सेब और अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन कांग्रेस सरकार अब तक कोई ठोस राहत योजना नहीं ला पाई है।“किसान-बागवान पहले ही महंगी खाद, बढ़ती लागत और कम दामों से परेशान हैं, ऊपर से प्राकृतिक आपदा ने उनकी कमर तोड़ दी है—लेकिन सरकार केवल बयानबाजी तक सीमित है,” उन्होंने कहा।संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस विधायक के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने राजस्व अधिकारियों से नुकसान का आकलन और मुआवजे की मांग की है।“यह काम सरकार का है, लेकिन जब विधायक खुद ही मांग कर रहे हैं, तो यह साफ है कि सरकार जमीन पर पूरी तरह नाकाम है,” उन्होंने कहा।उन्होंने कहा कि किसानों-बागवानों के लिए लोन में राहत, एमआईएस के तहत भुगतान और एचपीएमसी द्वारा बकाया राशि जारी करने जैसे मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं।“कांग्रेस सरकार ने न तो समय पर भुगतान किया और न ही राहत दी—इससे छोटे बागवान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं,” उन्होंने आरोप लगाया।संदीपनी भारद्वाज ने महंगाई के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि व्यावसायिक सिलिंडरों के दाम बढ़ने से आम जनता और व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।“एक तरफ कांग्रेस महंगाई की बात करती है, दूसरी तरफ उसकी सरकार ही जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है,” उन्होंने कहा।उन्होंने कांग्रेस नेताओं द्वारा केंद्र पर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि“हर विफलता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ना कांग्रेस की पुरानी आदत है—जबकि सच्चाई यह है कि प्रदेश सरकार की नीतियां ही पूरी तरह असफल हैं।”अंत में संदीपनी भारद्वाज ने कहा:“कांग्रेस सरकार न किसानों को राहत दे पा रही है, न बागवानों को सहारा—अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके अपने विधायक ही सरकार से जवाब मांग रहे हैं, जो इस शासन की सबसे बड़ी नाकामी है।”

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