पंजाब दस्तक: जिला ऊना विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

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🚩 पंजाब दस्तक: जिला ऊना विशेष ग्राउंड रिपोर्ट 🚩काजल राणा (वरिष्ठ पत्रकार, ऊना)🚨 ऊना में प्रशासनिक निष्क्रियता का बोलबाला: नशे का बढ़ता जाल और बदहाल व्यवस्था से जनता में भारी रोषऊना: सीमावर्ती जिला ऊना में इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते नशे के कारोबार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने यहाँ के निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। ‘पंजाब दस्तक’ की विशेष रिपोर्ट:नशे की ‘खेप’ और खाकी की ‘खामोशी’: पंजाब की सीमा से सटे ऊना के गांवों में चिट्टे और सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध कारोबार अब बेकाबू हो चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस की गश्त केवल मुख्य सड़कों तक सीमित है, जबकि अंदरूनी गलियों में मौत का सामान खुलेआम बिक रहा है। नशे के कारण उजड़ते परिवारों की चीखें प्रशासनिक बहरेपन का शिकार हो रही हैं।अस्पताल बना ‘रेफरल अड्डा’: क्षेत्रीय अस्पताल ऊना की हालत यह है कि यहाँ करोड़ों की आधुनिक मशीनों पर धूल जम रही है और विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद वर्षों से खाली हैं। गंभीर स्थिति में मरीजों को प्राथमिक उपचार के नाम पर सीधा चंडीगढ़ या टांडा रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।स्वां नदी का ‘चीरहरण’ और अवैध खनन: स्वां नदी के तटों पर मशीनों के जरिए हो रहा अनियंत्रित अवैध खनन भू-जल स्तर को तेजी से गिरा रहा है। प्रशासन की ‘निकम्मी’ कार्यप्रणाली का आलम यह है कि बार-बार की शिकायतों के बावजूद माइनिंग माफिया पर कोई ठोस शिकंजा नहीं कसा जा रहा।धूल और गड्ढों में गुम होती सड़कें: ऊना-हमीरपुर हाईवे सहित शहर की अंदरूनी सड़कों की हालत दयनीय है। उड़ती धूल ने दमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी है, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहा है।पेयजल का गहरा संकट: जिला के कई वार्डों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की पुरानी पाइपलाइनें बार-बार फट रही हैं। जल शक्ति विभाग की सुस्ती के चलते हज़ारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है और जनता तीसरे दिन पानी की बूंद-बूंद को तरस रही है।बिजली की अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज: ऊना शहर और औद्योगिक क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती से घरेलू कामकाज और उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। लो-वोल्टेज की निरंतर समस्या से लोगों के कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फुंक रहे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।बेसहारा पशुओं का आतंक: सड़कों और मुख्य चौराहों पर बेसहारा पशुओं के झुंड हादसों को न्योता दे रहे हैं। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा बनाए गए गोवंश केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।सफाई व्यवस्था का जनाज़ा: ऊना नगर परिषद के सफाई अभियान केवल फोटो तक सीमित हैं। उचित डंपिंग साइट न होने के कारण रिहायशी इलाकों के पास कूड़े के ढेर लगे हैं, जिससे संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।औद्योगिक प्रदूषण की मार: हरोली और मैहतपुर औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले जहरीले धुएं और गंदे पानी के सही निस्तारण न होने से स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की खामोशी पर जनता सवाल उठा रही है।कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान: जिला में चोरी और झपटमारी की बढ़ती वारदातों ने पुलिस की रात्रि गश्त की पोल खोल दी है। व्यापारियों में असुरक्षा का माहौल है और सीसीटीवी कैमरों के अभाव में अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं।शिक्षा विभाग में रिक्त पद: जिला के ग्रामीण सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। कई स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिससे ग्रामीण परिवेश के बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।महंगाई और डिपो में राशन की किल्लत: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन डिपुओं में आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर तेल और दालों की समय पर सप्लाई न होने से आम उपभोक्ता परेशान हैं।ट्रैफिक जाम की विकराल समस्या: ऊना के मुख्य चौक और आईएसबीटी के आसपास बेतरतीब पार्किंग और ट्रैफिक पुलिस की कम तैनाती से घंटों जाम लगा रहता है, जिससे एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी रास्ता नहीं मिल पाता।युवाओं में बेरोजगारी का आक्रोश: ऊना के उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से युवाओं में सरकार के प्रति गहरा रोष है।विकास कार्यों की ‘कछुआ चाल’: जिला में स्वीकृत कई महत्वपूर्ण सरकारी प्रोजेक्ट्स बजट के अभाव और प्रशासनिक लालफीताशाही के कारण अधर में लटके हैं, जिससे जनता को मिलने वाली सुविधाओं में देरी हो रही है।

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