पंजाब दस्तक: जिला सिरमौर विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

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पंजाब दस्तक: जिला सिरमौर विशेष ग्राउंड रिपोर्ट 🚩मीनाक्षी (वरिष्ठ पत्रकार, सिरमौर)🏔️ गिरिपार और नाहन में जनजीवन बेहाल: बर्फबारी और प्रशासनिक सुस्ती ने बढ़ाई जनता की दुश्वारियांनाहन/शिलाई: जिला सिरमौर के ऊपरी क्षेत्रों में भारी हिमपात और मैदानी इलाकों में बढ़ती ठंड ने जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। नाहन से लेकर गिरिपार के दूरदराज के क्षेत्रों तक जनता बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रही है, जबकि सरकारी मशीनरी के दावे धरातल पर कमज़ोर नज़र आ रहे हैं।ओवरलोडिंग और निजी बसों की मनमानी: गिरिपार क्षेत्र में एचआरटीसी (HRTC) बसों की कमी का फायदा निजी बस ऑपरेटर उठा रहे हैं। क्षमता से अधिक सवारी बैठाने और जानलेवा ओवरलोडिंग के बावजूद परिवहन विभाग का कोई नियंत्रण नहीं दिख रहा है।बिजली का भारी संकट: शिलाई और हरिपुरधार के दर्जनों गांवों में पिछले 36 घंटों से बिजली आपूर्ति ठप है। कड़ाके की ठंड में बिना हीटिंग और रोशनी के लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।पेयजल की किल्लत: पाइपें जमने और कई जगह बर्फबारी के कारण लाइनें टूटने से पानी की सप्लाई बाधित हुई है। जल शक्ति विभाग की ओर से वैकल्पिक जलापूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।एनएच 707 पर जानलेवा सफर: पांवटा-साहिब से शिलाई मुख्य मार्ग पर कई जगह लैंडस्लाइड और फिसलन के कारण गाड़ियां रेंग रही हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से हादसों का डर बना हुआ है।स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं का अभाव: गिरिपार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में न दवाइयां हैं और न ही डॉक्टर। मरीजों को छोटी समस्याओं के लिए भी नाहन या पांवटा रेफर किया जा रहा है।एम्बुलेंस सेवा लाचार: भारी बर्फबारी के कारण दुर्गम पंचायतों में 108 एम्बुलेंस नहीं पहुँच पा रही है। गंभीर मरीजों को ग्रामीण आज भी पालकी में उठाकर मुख्य सड़क तक ला रहे हैं।बागवानों का आक्रोश: सेब बाहुल्य क्षेत्रों में खाद और दवाइयों का सरकारी स्टॉक समय पर नहीं पहुँचा है। सड़कों के बंद होने से बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।शिक्षा पर मार: जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। ठंड के कारण बच्चों की उपस्थिति कम हो गई है, लेकिन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं।पशुपालन की चुनौती: चरागाह बर्फ से ढके होने के कारण चारे की भारी कमी हो गई है। पशुपालकों के पास सूखे चारे का स्टॉक खत्म हो रहा है और सरकारी मदद अभी तक नहीं पहुँची है।राशन डिपो में अनियमितता: जिला प्रशासन के पर्याप्त भंडारण के दावों के बीच, कई डिपुओं में दालों और सरसों तेल की कमी की शिकायतें मिल रही हैं।डिजिटल कनेक्टिविटी ठप: बिजली न होने से मोबाइल टावर बंद पड़े हैं, जिससे शिलाई के कई गांव पूरी तरह संचार विहीन हो चुके हैं।नाहन शहर में आवारा पशुओं का आतंक: जिला मुख्यालय नाहन में आवारा पशुओं के कारण बढ़ते हादसों पर नगर परिषद का कोई नियंत्रण नहीं है।विकास कार्यों की धीमी गति: नाहन और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्य बजट के अभाव में लटके हुए हैं।मजदूरों का पलायन: ठंड और काम की कमी के चलते निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है, जिससे सरकारी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार कम हुई है।पर्यटन केंद्रों पर अव्यवस्था: हरिपुरधार में पर्यटकों के लिए कोई पार्किंग या गाइडलाइन न होने से गाड़ियां बर्फ में फंस रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भी जाम झेलना पड़ रहा है।

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