शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश में सुशासन और सादगी की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसकी चर्चा पूरे प्रशासनिक अमले में हो रही है। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (इन्नोवेशन और डिजिटल टेक्नोलॉजी) गोकुल बुटेल ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी किसी भी तरह का वेतन या सरकारी लाभ लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने अपनी सेवाओं के बदले मात्र एक रुपए का टोकन मानदेय लेने का निर्णय लेकर एक बार फिर सभी को चौंका दिया है। प्रधान सलाहकार कार्यालय द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग को जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि गोकुल बुटेल केवल नाममात्र का वेतन ही नहीं, बल्कि (यात्रा और दैनिक भत्ता) जैसे अन्य सरकारी लाभ भी नहीं लेंगे। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह सरकारी खजाने पर बिना किसी वित्तीय बोझ के प्रदेश के विकास में अपना योगदान देना जारी रखेंगे। कार्मिक विभाग ने उन्हें आगामी वर्ष के लिए मानदेय की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, जिसके जवाब में यह निर्णय सामने आया है।
वर्तमान में गोकुल बुटेल मुख्यमंत्री के साथ जुडक़र राज्य में नवाचार और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने का अहम जिम्मा संभाल रहे हैं। बिना किसी आर्थिक स्वार्थ के काम करने के उनके इस कदम को प्रशासनिक हलकों में स्वैच्छिक सेवा के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। आर्थिक संकट से गुजर रही सरकार के इस कठिन समय में गोकुल बुटेल अन्य नेताओं के लिए मिसाल बन गए हैं। जनता में भी गुरुवार को इसी बात की चर्चा रही कि अन्य नेता भी ऐसा ही करें, तो प्रदेश के राजस्व को बड़ा लाभ होगा। सुरक्षा, गाडिय़ों के काफिले सहित अपने साथ अटैच स्टाफ को भी घटा दें, तो और बेहतर होगा।
