सुरेंद्र राणाचंडीगढ़/हमीरपुर: साल 2026 का बजट पेश हो चुका है, लेकिन मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के चेहरे पर वो चमक नहीं दिखी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। जमीनी हकीकत और जनता की नब्ज टटोलने पर यह साफ नजर आता है कि महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी के लिए इस बजट में कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। यही कारण है कि बजट को लेकर हर तरफ ‘फीकेपन’ की चर्चा हो रही है।क्यों लग रहा है बजट फीका? प्रमुख कारण:टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव नहीं: नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद थी कि इनकम टैक्स की सीमा में बड़ी छूट मिलेगी, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच उनके पास कुछ बचत हो सके। लेकिन सरकार ने पुराने ढांचे में मामूली फेरबदल कर ही संतोष कर लिया।महंगाई पर लगाम का अभाव: रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किसी ठोस रोडमैप की कमी दिखी।युवाओं की मायूसी: नए स्टार्टअप और रोजगार सृजन के लिए किसी बड़े और क्रांतिकारी पैकेज का एलान नहीं हुआ।हमारी टीम का विश्लेषण: जनता द्वारा, जनता के लिएपंजाब दस्तक की टीम ने जब समाज के विभिन्न वर्गों से बात की, तो बजट का मिला-जुला और कुछ हद तक निराशाजनक फीडबैक सामने आया:मध्यम वर्ग की राय: सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने माना कि टैक्स में राहत न मिलना सबसे दुखद पहलू रहा।रसोई पर बोझ: गृहणियों का कहना है कि बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं है जिससे रसोई के जरूरी सामानों के दाम कम हों।व्यापारी वर्ग का नजरिया: छोटे व्यापारियों का मानना है कि बजट बड़े कॉरपोरेट घरानों पर केंद्रित ज्यादा है, जबकि छोटे दुकानदारों के लिए इसमें प्रोत्साहन की कमी है।निष्कर्ष: हमारी टीम के विश्लेषण के अनुसार, यह बजट सरकारी आंकड़ों और भविष्य की योजनाओं में तो मजबूत दिख सकता है, लेकिन आम आदमी की वर्तमान थाली और जेब के लिए फिलहाल यह ‘फीका’ ही साबित हो रहा है। जनता की मांग है कि भविष्य के दावों के साथ-साथ वर्तमान की महंगाई से राहत देना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
