शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने केंद्रीय बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रविवार को पेश किया गया बजट प्रदेश के लिए बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इस बजट में न तो पहाड़ी राज्य हिमाचल की आर्थिक जरूरतों को समझा गया है और न ही उसकी विशिष्ट परिस्थितियों का ध्यान रखा गया है।
नरेश चौहान ने कहा कि प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की यह ग्रांट मिली थी और सरकार को उम्मीद थी कि हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी वाले राज्य को आगे भी यह सहायता मिलेगी, लेकिन बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं किया गया। इससे प्रदेश को सीधे तौर पर भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था के दो मुख्य आधार बागवानी और पर्यटन हैं, जिनका प्रदेश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान है, बावजूद इसके बजट में इन दोनों क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया। विदेशों से आने वाले सेब सहित अन्य उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर भी बजट पूरी तरह खामोश है, जिससे बागवानों में गहरी निराशा है। उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, बागवानों, कृषि मजदूरों और युवाओं के कल्याण के मुद्दे पर भी मौन है।
नरेश चौहान ने कहा कि यह बजट न केवल हिमाचल बल्कि राज्यों के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी राज्य की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस बजट से उत्पन्न परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन करेगी और हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
