हमीरपुर, सुरेन्द्र राणा: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि बीपीएल परिवारों का नाम प्रदेश में किसी भी पंचायत में अभी किसी का नहीं काटा गया है। अभी महज सर्वे में गरीब लोगों का डाटा एकत्र किया गया है। इसमें ऐसे गरीब और जरूरतमंद लोगों का डाटा तैयार किया जा रहा है, जिन्हें एक भी बार गरीबों के लिए चलाई जा रही किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है, जबकि वे बीपीएल में है। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में सरकार द्वारा इस कार्य के तहत अध्ययन किया जा रहा है। एक दिवसीय दौरे पर रविवार को नादौन पहुंचे मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उन अटकलों पर बीजेपी के उन बयानों पर विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि बीपीएल सूची से लोगों का नाम काट दिया गया है।यहां मीडिया के सवालों के जबाव में प्रदेशभर की पंचायतों में बीपीएल परिवारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। अभी एसडीएम और बीडीओ के माध्यम से इन परिवारों को सत्यापित किया जा रहा है कि बीपीएल में होना चाहिए अथवा नहीं। अभी इन्हें बीपीएल से काटने का निर्णय नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने बीजेपी सरकार के जनमंच कार्यक्रमों को लेकर कहा कि लगभग 50 करोड़ रुपया जनमंच पर खर्च किया गया। इस जनमंच में अधिकारियों को डांटने और जलील करने का कार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के प्रदेश में जी राम जी योजना पर जन जागरण अभियान शुरू करने के सवाल पर कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा को खत्म करने का कार्य किया गया है। मनरेगा की आत्मा को मार दिया गया है। पहले पंचायत की मांग के अनुसार मनरेगा योजना चलती थी। केंद्र सरकार ने इसमें बदलाव किया है कि अब केंद्र सरकार की ओर से पंचायतों को इस योजना में चिहिन्त किया जाएगा।अब इसमें तालाब-रास्ते नहीं बनेंगे, बल्कि जो स्कूल बिल्डिंगें आदि बनेंगी, उसमें लोगों को काम दिया जाएगा। यही नहीं, पहले 100 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन अब 10 फीसदी प्रदेश सरकार को भी वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि योजना पर पूरा कंट्रोल केंद्र सरकार का रहेगा। प्रदेश की कांग्रेस सरकार इसके खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रदेश के सांसदों को इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र की इस योजना के विरोध में जनता की अदालत में जाएगी।
