केसीसी बैंक का डीजीएम बर्खास्त, प्रशासक ने वित्तीय गड़बड़ी का हवाला देकर लिया फैसला

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धर्मशाला, काजल; वन टाइम सेटलमेंट के जरिए करोड़ों का लोन माफ करने का मामला अभी शांत ही हुआ था कि केसीसी बैंक में एक और बड़ा मामला सामने आ गया है। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक प्रबंधक ने बैंक के एक डिप्टी जनरल मैनेजर को गंभीर गड़बड़ के आरोप में सिद्ध होने का दावा करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कड़ा निर्णय बैंक के प्रशासक द्वारा लिया गया है। सेवा से निष्कासन के साथ-साथ बैंक को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई भी डिप्टी जनरल मैनेजर से नौ प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने के आदेश जारी किए हैं। 20 जुलाई , 2024 को बैंक के डीजीएम को बैंक सेवा नियमों के तहत चार प्रमुख आरोपों के लिए चार्जशीट किया गया था। हालांकि उस समय डीजीएम ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन बैंक द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी नवदीप महाजन डीजीएम ने अपनी रिपोर्ट में सभी आरोपों को सही पाया।

बैंक प्रशासक द्वारा चार पन्नों के पत्र में लिखा गया है कि जांच के दौरान हाजिरी रिकॉर्ड, मेडिकल क्लेम और यात्रा भत्ता दावों जैसे महत्त्वपूर्ण दस्तावेजी सबूतों का बारीकी से मिलान किया गया, जो डीजीएम के खिलाफ पाए गए। जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड और उनके द्वारा प्रस्तुत मूवमेंट रजिस्टर के विवरण में भारी विसंगतियां पाई गई हैं। जांच में दोषी पाए जाने के बाद बैंक के प्रशासक विनोद कुमार ने डीजीएम को नौकरी से बर्खास्त करने का पत्र जारी कर दिया है और बैंक को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई नौ प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने के आदेश जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि वर्खास्त किए गए डीजीएम कुछ ही दिनों में सेवानिवृत्त होने वाले थे और उनकी सेवानिवृत से पहले ही बैंक प्रबंधन ने कड़ा निर्णय लेते हुए कार्रवाई की है।

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