हिमाचल की सुक्खू सरकार हर मोर्चे पर विफल, जयराम ठाकुरकहा – शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरेगा विपक्ष, तीन साल का कार्यकाल रहा निराशाजन

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धर्मशाला, अभय : हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मौजूदा कांग्रेस सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार चारों तरफ़ से घिरी हुई है, प्रदेश में मुद्दों की भरमार है और तीन वर्षों का कार्यकाल पूर्णत: निराशाजनक रहा है। भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं पार हो चुकी हैं, नेताओं और अधिकारियों पर गंभीर आरोप हैं और पूरे प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं।जयराम ठाकुर ने कहा कि बेरोज़गारी, आर्थिक बदहाली, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और नशे के बढ़ते प्रचलन जैसे मुद्दे इस बार के विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रमुख रूप से उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति इतनी ख़राब कभी नहीं रही जितनी आज है, और इसके बावजूद मुख्यमंत्री झूठे दावों और बयानों से जनता को गुमराह करने में लगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार तीन साल का “जश्न” मना रही है, जबकि प्रदेश का आम नागरिक परेशान है। भारतीय जनता पार्टी इन सभी मुद्दों को लेकर शीतकालीन सत्र के दौरान प्रभावी रणनीति के साथ सरकार को कठघरे में खड़ा करेगी।नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस में व्याप्त गुटबाज़ी पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी टूटी और बिखरी हुई है—एक ओर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का गुट है, दूसरी ओर विक्रमादित्य सिंह का हॉलीलॉज गुट; वहीं कुलदीप राठौर और कुछ अन्य नेता अपने-अपने समूह चला रहे हैं। कांग्रेस में इतने गुट बन गए हैं कि गिनना भी मुश्किल हो गया है। मुख्यमंत्री को अब अपनी पार्टी को संभालने की चिंता करनी चाहिए, क्योंकि उनकी ही पार्टी के लोग उन्हें नेता नहीं मानते।जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा से हुए नुक़सान की भरपाई की पहली ज़िम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो कहते हैं, वह “पत्थर पर लकीर” होता है, लेकिन प्रदेश सरकार अपने वायदों पर अमल करने में नाकाम रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने डिज़ास्टर एक्ट की आड़ में पंचायत चुनाव स्थगित कर दिए हैं क्योंकि उन्हें हार का डर सता रहा है। आपदा राहत के नाम पर केवल बयानबाज़ी हो रही है, जबकि ज़मीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा। सड़कों की स्थिति जस की तस है, और करोड़ों रुपये की सेब की फसल लोगों के बगीचों में ही सड़ गई क्योंकि सरकार सड़कें तक दुरुस्त नहीं कर पाई।

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