धारा 118 में कोई छेड़छाड़ नहीं,विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: हाल ही में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार धारा 118 के बहाने प्रदेश के हितों को बेच रही है। इस पर पलटवार करते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर विचलित हो गए हैं क्योंकि आने वाले समय में भाजपा के जो संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं, उनमें से उनका नाम हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसी कारण से नेता प्रतिपक्ष असंतुलित बयान दे रहे हैं, जबकि भाजपा के अपने ही कार्यक्रमों में किसी और को मुख्यमंत्री बनाए जाने के नारे लगाए जा रहे हैं। राजस्व मंत्री ने कहा कि धारा 118 में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है और बिना विधानसभा की मंजूरी के इसमें संशोधन संभव ही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा में पहले जो संशोधन किया गया था, वह केवल धार्मिक संस्थाओं के लिए था, ताकि उन्हें सेलिंग एक्ट से बाहर रखा जा सके। उन्होंने बताया कि अगर कोई धार्मिक संस्था जिसके पास 150 बीघा तक भूमि है, वह भूमि धार्मिक प्रयोजन के लिए आगे बेचना चाहती है, तो उसे इसकी अनुमति दी जा सकती है। यही संशोधन बिल में किया गया था। मंत्री ने कहा कि जब यह बिल सदन में लाया गया था, तब विपक्ष की ओर से किसी ने भी इस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी और विपक्ष ने भी इसे सहमति से पास कराया था। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष दबी आवाज में जो बातें कर रहा है, वह केवल जनता को गुमराह करने की कोशिश है।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस समय प्रदेश में कोई भी व्यक्ति बेघर नहीं है। बारिश और आपदा के दौरान जिन लोगों के मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे, सरकार ने सभी के लिए रहने की व्यवस्था की है। कई लोग किराये के मकानों में रह रहे हैं और उन्हें सरकार की ओर से 5000 रुपये प्रति माह किराया सहायता दी जा रही है। आपदा में 1800 से अधिक मकान पूरी तरह नष्ट हुए, जबकि 8000 से ज्यादा मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। प्रभावित लोगों की मदद के लिए सरकार ने स्पेशल पैकेज 2023 लागू किया है, जिसे अब पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। इस पैकेज के तहत पूरी तरह टूटे मकानों के लिए 7 लाख रुपये, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1 लाख रुपये, और छोटे व्यवसायिक नुकसान के लिए 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 1 नवंबर को मंडी और कुल्लू में विशेष राहत वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां वे प्रभावित परिवारों को 4 लाख रुपये की पहली किस्त के रूप में चेक वितरित करेंगे। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये की राहत राशि अब तक नहीं मिली है, फिर भी प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि वन भूमि पर कब्जे को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं, लेकिन किसी को भी इस पर छूट देने का कोई कानून नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी या वन भूमि पर अधिकार सिर्फ वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ही मान्य हो सकते हैं। मंत्री ने बताया कि इस कानून के अनुसार 13 दिसंबर 2005 से पहले जो भी व्यक्ति या परिवार, चाहे जनजातीय हों या गैर-जनजातीय, जंगलों या बंद भूमि पर रहकर अपना जीवन यापन कर रहे थे, वे इस कानून के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून सरल है और कोई जटिल प्रक्रिया नहीं है। अगर कोई व्यक्ति यह साबित कर देता है कि वह 2005 से पहले उस भूमि पर रह रहा है और ग्राम सभा तथा दो स्थानीय बुजुर्ग लोग उसकी पुष्टि करते हैं, तो उसे उस भूमि पर अधिकार मिल सकता है। नेगी ने बताया कि अब तक किन्नौर में 600 से अधिक, लाहौल-स्पीति और भरमौर में बड़ी संख्या में पात्र लोगों को भूमि अधिकार दिए गए हैं।

  • विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इस बार सेब की फसल सड़क किनारे रखी गई, जिससे प्रदूषण और बीमारियों का खतरा बढ़ा। इस पर जवाब देते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर काफी देर से प्रतिक्रिया दे रहा है, क्योंकि इस बार एचपीएमसी ने एक लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब की खरीद की है।
    उन्होंने स्वीकार किया कि सड़क मार्ग बंद होने के कारण कुछ जगहों पर सेब सड़क किनारे रखे गए थे, लेकिन इस बार फसल को नालों में नहीं फेंका गया ताकि प्रदूषण न फैले। मंत्री ने बताया कि एसडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने यह तय किया कि जो सेब पूरी तरह खराब हो गए हैं उन्हें नष्ट करने के लिए योजना बनाई जाएगी, और जो सेब जूस बनाने योग्य थे, उनका उपयोग जूस उत्पादन के लिए किया गया।

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