शिमला, सुरेन्द्र राणा:सडक़ हादसों की चुनौती से हिमाचल प्रदेश भी अछूता नहीं है। राज्य में वर्ष 2025 में सितंबर माह तक नौ माह में 1406 सडक़ हादसों में 575 लोगों ने जान गंवाई है, जबकि 2298 लोग घायल हुए हैं। प्रदेश की अधिकांश सडक़ें पहाड़ी, संकरी और जोखिम भरी हैं। इसके साथ वाहन चालकों की लापरवाही, ओवर स्पीडिंग और ओवरटेकिंग जैसे कारण अधिकांश दुर्घटनाओं के पीछे हैं। हिमाचल प्रदेश में सडक़ हादसों कारण जिसमें खराब मौसम में भी तेज रफ्तार वाहन चलाना, सडक़ किनारे अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, सडक़ निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी, ग्रामीण सडक़ों की दशा खराब होना और रात्रि में दृश्यता की कमी और उचित साइनेज का अभाव है। प्रदेश पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा मिलकर कई महत्त्वपूर्ण पहल की जा रही हैं, जिससे प्रदेश में हादसों में कमी दर्ज की गई है। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा मिलकर कई महत्त्वपूर्ण पहल से वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश में सडक़ हादसों में 16.94, मृत्यु दर में 15.89 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 20.57 प्रतिशत की आई कमी दर्ज की गई है। 2022 में प्रदेश में कुल 2597 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1032 लोगों की मौत और 4063 से अधिक लोग घायल हुए।इसके अलावा वर्ष 203 में प्रदेश में कुल 2253 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 889 लोगों की मौत और 3304 से लोग घायल हुए। वर्ष 2024 में प्रदेश में कुल 2157 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 868 लोगों की मौत और 3227 लोग घायल हुए। वहीं, वर्ष 2025 में सितंबर माह तक प्रदेश में कुल 1406 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 575 लोगों की मौत और 2298 से लोग घायल हुए हैं। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार किया गया है। पुलिस विभाग की ओर से जनजागरूकता अभियान स्कूल, कालेज और पंचायत स्तर पर सडक़ सुरक्षा सप्ताह एवं प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। ड्राइविंग स्कूलों का सशक्तिकरण, जिसमें लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक कठोर और पारदर्शी बनाया गया है। वहीं, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, एम्बुलेंस सेवा और हेली-रेस्क्यू तंत्र को अधिक सक्रिय और उत्तरदायी बनाया जा रहा है।
