हिमाचल में रि-शेड्यूल होंगे आपदा प्रभावितों के बैंक लोन

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल में आपदा प्रभावितों को राज्य सरकार के अलावा बैंक भी राहत दे सकते हैं। हिमाचल सरकार ने सभी बैंकों को इस बारे में आग्रह किया है। प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के सिंगल एजेंडा पर स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की बैठक शिमला में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में हुई। इसमें आपदा प्रभावितों को राहत देने के लिए तीन स्तर पर कदम उठाने को कहा गया है। आपदा प्रभावित लोगों के लिए ऋण पुनर्गठन और राहत उपाय लागू करने का निर्णय इस बैठक में लिया गया। बैठक में चर्चा हुई कि सभी प्रभावित कर्जदारों को एक साल की मोरेटोरियम अवधि के साथ कर्ज पुनर्गठन मिल सकता है। कृषि ऋण में 33 प्रतिशत से 50 प्रतिशत नुकसान होने पर दो साल तक और 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर पांच साल तक पुनर्भुगतान की व्यवस्था होनी चाहिए। दीर्घकालिक कृषि ऋण और गैर-कृषि ऋण जैसे एमएसएमई, पर्यटन और कुटीर उद्योगों के लिए भी पुनर्गठन और मोरेटोरियम लागू होनी चाहिए। बीमा राशि का समायोजन पुनर्गठित ऋण में करने को लेकर भी प्रस्ताव लाया गया था। इसमें अब आरबीआई के रीजनल डारेक्टर अनुपम किशोर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी।यह कमेटी इस पर पूरा ब्यौरा लेगी और बैंकर्स की ओर से उठाए गए मसलों का हल करेगी। मुख्य सचिव प्रबेोध सक्सेना ने बताया कि प्रदेश में साढ़े छह लाख कृषि संबंधी खाते, करीब दो लाख एमएसएमई और आठ लाख अन्य खाते प्रभावित हुए हैं। इन खातों से जुड़े लोगों को राहत पैकेज देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि आज एक प्रस्ताव पारित किया गया है जिसके तहत सभी बैंक अपने उच्च अधिकारियों से बातचीत कर प्रभावित लोगों को राहत देने की दिशा में कदम उठाएंगे। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशक की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जो एक हफ्ते के भीतर इस विषय पर चर्चा करेगी। मुख्य सचिव ने बताया कि इसके बाद राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) इस संबंध में जल्द ही एक पत्र जारी करेगी, ताकि प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल सके।

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