शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश के गांवों में पानी का बिल लेने के लिए सरकार ने पंचायतों को अधिकृत कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब पंचायतें ही पानी की दरें तय करेंगी। इसमें प्रदेश सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा। पानी की दरें निर्धारित करने से पहले प्रस्ताव ग्राम सभा में लाना होगा। ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद ही दरें तय की जा सकेंगी। पानी के बिलों से प्राप्त राशि पंचायतों के पास रहेगी। इसी राशि से पानी की योजनाओं का रखरखाव किया जा सकेगा।
अभी सरकार की ओर से पंचायतों में लोगों को निशुल्क पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। ग्रामीणों को नियमित पानी की सप्लाई देने का जिम्मा पंचायत पर रहेगा। जल शक्ति विभाग इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। जिस वार्ड में पानी की सप्लाई दी जाएगी, वहां सबूत के तौर पर पेयजल सप्लाई देने वाले कर्मचारियों को प्रधान से हस्ताक्षर कराने होंगे, ताकि यह पता रहे कि पंचायत के वार्ड में इस दिन पानी की सप्लाई दी गई है।
अगर किसी वार्ड में पानी की सप्लाई नहीं होती है तो पंचायत को इसका भी समाधान करना होगा। हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में जल शक्ति विभाग की पेयजल स्कीमों का संचालन और मरम्मत का जिम्मा भी अब पंचायतों को दे दिया है। इसको लेकर प्रदेश सरकार पंचायतों के लिए 354 करोड़ रुपये भी जारी करने जा रही है। जल शक्ति विभाग में कर्मचारियों का अभाव है। ऐसे में यह जिम्मा पंचायतों को दिया गया है। पंचायतों को जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन में अधिक अधिकार दिए गए हैं। जल स्तर का पता करने के लिए स्रोतों की जियो टैगिंग की जाएगी। सरकार की ओर से पंचायतों को ग्रांट भी जारी की जाएगी। योजना के मुताबिक जल रक्षक टैंकों की साफ-सफाई करेंगे, जबकि पानी की सप्लाई छोड़ने का जिम्मा बेलदार या कीमैन का रहेगा।पंचायतें आय के साधन बढ़ाने के लिए पानी के मासिक बिल जारी कर सकती है। उन्हें ये शक्तियां दी गई हैं। ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित करने के बाद ही पानी के बिल की राशि तय की जा सकती है। लोगों से मासिक कितना बिल लिया जाएगा, यह पंचायतों पर निर्भर रहेगा।- अनिरुद्ध सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री
