शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सभी पेंशनर्स की एक दिन की बेसिक पेंशन मुख्यमंत्री राहत कोष में काटने संबंधी कथित घोषणा को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव भूपराम वर्मा ने प्रेस बयान जारी करते हुए इस फैसले को “अलोकतांत्रिक और पेंशनर्स की भावनाओं के खिलाफ” करार दिया है।
भूपराम वर्मा ने स्पष्ट किया कि आत्माराम शर्मा न तो एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और न ही रजिस्ट्रेशन संख्या 10-16/89 के तहत किसी तरह से प्राथमिक सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि आत्माराम शर्मा को शिमला शहरी इकाई द्वारा निष्कासित किया जा चुका है, ऐसे में वह किसी भी पद पर रहने का दावा नहीं कर सकते।
एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि जो व्यक्ति संगठन का वैध सदस्य ही नहीं है, वह कैसे पेंशनर्स की ओर से इतनी बड़ी घोषणा कर सकता है। भूपराम वर्मा ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि बिना पेंशनरों की सहमति से राहत कोष में राशि काटने का निर्णय लिया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि 8 जुलाई 2025 को कांगड़ा में संपन्न हुए प्रदेश स्तरीय चुनाव में 260 डेलीगेट्स और लगभग 800 सदस्यों ने भाग लिया था, जिसमें सुरेश ठाकुर को प्रदेशाध्यक्ष और भूपराम वर्मा को महासचिव चुना गया। एसोसिएशन का कहना है कि इसी वैध नेतृत्व के अंतर्गत भविष्य के किसी भी सहयोग या निर्णय पर विचार किया जाएगा।
एसोसिएशन ने आत्माराम शर्मा से तुरंत अपनी घोषणा वापस लेने की मांग की है और कहा है कि उनका कथित चुनाव असंवैधानिक है। यह मामला वर्तमान में पंजीयक, सहकारी सभाएं हिमाचल प्रदेश के समक्ष विचाराधीन है।
भूपराम वर्मा ने दोहराया कि पेंशनर्स की भावनाओं और अधिकारों की अनदेखी कर एकतरफा निर्णय किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
