शिमला, सुरेन्द्र राणा:हिमाचल में स्टेट कोटा का फार्मूला बदलने के कारण एमबीबीएस एडमिशन की प्रक्रिया इस बार बदल गई है। सोमवार से शुरू हो रहे सप्ताह में काउंसलिंग का शेड्यूल आने वाला है, जिसके तहत कुल 720 में से करीब 602 स्टेट कोटा सीटों पर एडमिशन फाइनल होगी। बाकी सीटें ऑल इंडिया कोटा और ईएसआई को दी जाती हैं। राज्य सरकार ने इस बार एकेडमिक सेशन 2022-23 के फार्मूले को एडमिशन की एलिजिबिलिटी के लिए लिया है। इसके तहत अब नॉन रेजिडेंट हिमाचलियों के बच्चे भी स्टेट कोटा से बाहर हो गए हैं।अब एडमिशन तीन तरह के बिंदुओं से होगी। हिमाचली बोनाफाइड के बच्चों के लिए आठवीं, 10वीं 11वीं और 12वीं कक्षाओं में से कोई दो कक्षाएं हिमाचल में पढ़ी होनी चाहिए। गैर हिमाचली परिवारों के बच्चों के लिए 11वीं और 12वीं कक्षा हिमाचल में पढ़ी होनी चाहिए, बशर्ते अभिभावक सरकारी सेवा में हो। यदि हिमाचल का कोई व्यक्ति हिमाचल से बाहर सरकारी सेवा के कारण है, तो उसका बच्चा स्टेट कोटा के लिए अप्लाई कर सकता है।
इस तरह यदि बाहर का कोई व्यक्ति हिमाचल में सरकारी सेवा के कारण है, तो उन्हें यहां की पढ़ाई दिखानी है। हिमाचल में एमबीबीएस एडमिशन की प्रक्रिया अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी पूरी करती है। बिलासपुर एम्स की एडमिशन भारत सरकार करती है, जबकि छह सरकारी मेडिकल कालेज और एक प्राइवेट मेडिकल कालेज का एडमिशन इसी काउंसलिंग के जरिए होता है। आईजीएमसी, टांडा के अलावा हमीरपुर, नेरचौक, नाहन और चंबा मेडिकल कालेज सरकारी क्षेत्र के हैं। सोलन स्थित महर्षि मारकंडेश्वर मेडिकल कॉलेज निजी क्षेत्र का है। चार डेंटल कालेज की सीटें भी इसी काउंसलिंग से भरी जाएंगी। काउंसलिंग का शेड्यूल भी दिल्ली से तय होगा।
पिछले साल 66 अन्य छात्र पा गए थे एडमिशनराज्य सरकार ने हिमाचल से बाहर रह रहे हिमाचलियों की डिमांड पर पिछली बार इस शर्त में बदलाव कर दिया था और नॉन रेजिडेंट हिमाचलियों को भी स्टेट कोटा ऑफर कर दिया था। इसके कारण बाहर पढ़े 66 कैंडीडेट एडमिशन पा गए थे। इस बार इनकी संख्या ज्यादा होने की आशंका थी। इसलिए इस बार नियम को बदल दिया गया। एक शिकायत यह भी आ रही थी कि फर्जी डोमिसाइल बनाने की प्रक्रिया बढ़ रही है।
