चंडीगढ़, सुरेंद्र राणा: सरकारी डाक्टरों के अग्रणी संगठन पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने अपने सभी जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें सोमवार नौ सितंबर से घोषित आधे दिन की हड़ताल में थोड़ा बदलाव करते हुए इसे सोमवार से अगले तीन दिन के लिए कर दिया गया है। यानी सुबह आठ से 11 बजे तक सरकारी अस्पतालों में सेवाएं बंद रखने का फैसला किया गया है। पहले उन्होंने अनिश्चित काल तक पूर्ण बंद की घोषणा की थी, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री की अपील और कैबिनेट की उप समिति के रूप में वित्त मंत्री के साथ बैठक करने के निमंत्रण के बाद डाक्टरों ने मरीजों और जनता की सुरक्षा का फैसला किया। इसके अलावा कोई वैकल्पिक संचालन नहीं होगा। संगठन के मुताबिक भर्ती संबंधी परीक्षाएं, ड्राइविंग लाइसेंस और हथियार लाइसेंस के लिए मेडिकल परीक्षाएं जैसी सामान्य मेडिकल परीक्षाएं नहीं होंगी। न कोई डोप टेस्ट होगा और न ही कोई वीआईपी ड्यूटी। इसके अलावा डेंगू के अलावा कोई भी रिपोर्ट नहीं भेजी जाएगी। डाक्टरों के मुताबिक इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि हम बातचीत के लिए सहज माहौल बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन फिर भी सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन जमीनी स्तर तक नहीं पहुंचे और न ही सरकार ने बार-बार समयबद्ध प्रोन्नति को लेकर कोई अधिसूचना निकाली।
अगर इसके बाद भी सरकार ने अपना ढीला रवैया बरकरार रखा, तो उनकी किसी भी बात पर भरोसा करना मुश्किल हो जाएगा। यह आंदोलन अपनी जायज मुख्य मांगों को माने बिना नहीं रुकेगा। एसोसिएशन के प्रधान ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि क्या सरकार प्रमोशन रोककर सरकारी अस्पतालों को ख़त्म करना चाहती है, क्योंकि इस तरह अच्छे और विशेषज्ञ डाक्टर सरकारी अस्पतालों से चले जाएंगे। निकटवर्ती राज्य दिल्ली और हरियाणा भी वित्त आयोग के समान निर्देशों के बावजूद एसीपी दे रहे हैं, क्या पंजाब के डाक्टरों को पंजाब छोडक़र बगल के राज्य में चले जाना चाहिए। पंजाब सरकार के दूसरे विभाग मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान में हमारे अपने डाक्टरों को चार और सात साल में पदोन्नत किया जा रहा है, तो फिर सबसे महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य विभाग को पदोन्नत कर कब्ज़ा क्यों किया जा रहा है। संगठन ने साफ कर दिया है कि अगर 11 सितंबर की बैठक बेनतीजा रही और प्रमोशन को लेकर नोटिफिकेशन नहीं आई, तो 12 से पूर्ण हड़ताल कर दी जाएगी।
